UP Election Commission News : उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट से जुड़े एक दावे को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया है। हाल में प्रज्ञा गुप्ता नाम की एक यूजर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर द रिपोर्टर्स कलेक्टिव का एक वीडियो साझा कर दावा किया कि यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने खुद माना है कि चुनाव आयोग के सिस्टम ने 85 हजार से अधिक वोटरों के फॉर्म अपने आप यानी ऑटो-डिलीट कर दिए। इस पोस्ट में आरोप लगाया गया कि जिनके नाम हटाए गए, उनमें सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम मतदाताओं की थी। इसे अधिकारी का सीधा कबूलनामा बताया गया।
UP CEO दफ्तर की कड़ी सफाई
इस दावे के सामने आते ही उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के आधिकारिक हैंडल से इसका खंडन किया गया। आयोग ने बताया कि यह भ्रामक और फर्जी खबर है। सीईओ की ओर से ऐसा कोई बयान कभी जारी नहीं किया गया। आयोग के मुताबिक द रिपोर्टर्स कलेक्टिव की रिपोर्ट और उससे जुड़े एक्स पोस्टों में मनगढ़ंत बातें, गलत धारणाएं और बेबुनियाद आरोप शामिल हैं, जिन्हें खास मंशा से तैयार किया गया है। चुनाव आयोग ने इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि धर्म के आधार पर भ्रम फैलाने वाली ऐसी झूठी खबरों से देश की अखंडता को नुकसान पहुंच सकता है। जिम्मेदार अधिकारियों से मामले में तत्काल कड़ा कानूनी कदम उठाने की अपील भी की गई है।
Video में क्या-क्या दावे किए गए थे?
द रिपोर्टर्स कलेक्टिव के जिस वीडियो को शेयर किया गया था, उसमें कहा गया था कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान राज्य में 85854 ऐसे वोटर डिलीशन फॉर्म सामने आए, जिनमें नाम हटाने की कोई वजह ही दर्ज नहीं थी। वीडियो में यह भी कहा गया कि आयोग के सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण ऐसे फर्जी फॉर्म बने और यह सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि हर जगह की कहानी है।
वीडियो में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कई प्रश्न उठाए गए:-
- एसआईआर के नाम पर 100 करोड़ देशवासियों को जांच से गुजरना पड़ा, लेकिन इससे क्या हासिल हुआ?
- घुसपैठियों के नाम पर असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा और 14 करोड़ भारतीयों के मताधिकार पर असर पड़ा है।
- देश में इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिये हैं तो यह गृह मंत्रालय की नाकामी को दर्शाता है।
- संस्थाओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा तथा CEC ज्ञानेश कुमार को बचाने का प्रयास किया जा रहा।
प्रज्ञा गुप्ता के आरोप
इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रज्ञा गुप्ता ने लिखा कि यह एक बहुत बड़ा खुलासा है, जो मौजूदा सत्ता के खिलाफ चल रही लड़ाई को सही साबित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस प्रशासन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रहे हैं, जबकि एक विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम असंवैधानिक तरीके से सूची से हटाए गए हैं।
क्या होता है ऑटो-डिलीट और चुनाव आयोग का नियम?
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदाता सूची से किसी भी नागरिक का नाम बिना भौतिक सत्यापन और उचित प्रक्रिया (Form 7 की जांच) के सीधे ऑटो-डिलीट नहीं किया जा सकता। आयोग के डिजिटल पोर्टल (जैसे Voter Helpline App या ECI Portal) पर कोई तकनीकी त्रुटि या डुप्लीकेट एंट्री मिलती भी है तो उस पर अंतिम फैसला संबंधित BLO और ERO की फील्ड रिपोर्ट के बाद ही लिया जाता है।
फर्जी खबरों पर सख्त कानूनी रुख
हाल में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक अफवाहों से निपटने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अपनी मिसाइन्फॉर्मेशन कॉम्बैट इकाई को एक्टिव कर दिया है। भ्रामक दावे करने वाले अकाउंट्स के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।