दिल्लीः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने 7 हाई-डेंसिटी नेटवर्क को मंजूरी दे दी है। इन रेल कॉरीडोर को फोरलेन बनाया जाएगा।  फोरलेन कॉरीडोर बनने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और ट्रेनों का लेन होने पर लगाम लगेगी। सथा ही 5 राज्यों के 14 जिलों के लगभग 56 लाख लोगों को रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।

घटेगा रेल्वे ट्रैफिक का दबाव

केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में 11,000 किलोमीटर लंबे, 7 हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर हैं, जिन्हें दिल्ली से मुंबई, मुंबई से चेन्नई, चेन्नई से कोलकाता और कोलकाता से मुंबई - यह 'गोल्डन क्वाड्रिलैटरल' कहा जाता है। इन रेल नेटवर्क पर भारतीय रेल्वे का लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक रहता है। इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को अब 4-लेन (क्वाड्रुपलिंग) का बनाया जा रहा है, साथ ही कई दूसरे कॉरिडोर पर भी काम हो रहा है।

रेल कॉरीडोर पर काम जारी

अश्विन वैष्णन के मुताबिक इन कॉरिडोर में से लगभग 2000 किलोमीटर पहले ही 4-लेन का हो चुका है. लगभग 5000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है और बाकी 4000 किलोमीटर को अंतिम मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है.

उत्तर प्रदेश को मिलेगा फायदा

 उत्तर प्रदेश के लिए दिल्ली-हावड़ा  रेल कॉरीडोर रेल यातायात को नई रफ्तार देगा। इस कॉरीडोर में दिल्ली से चल कर कानपुर, प्रयागराज, पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर, पटना और आसनसोल शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई कॉरीडोर, दिल्ली गुवाहाटी औऱ दिल्ली-चेन्नई कॉरीडोर से ट्रेन यातायात बेहतर हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश पहले से ही देश के सबसे व्यस्त रेल नेटवर्क में शामिल है। दिल्ली-कानपुर-प्रयागराज-डीडीयू रूट पर यात्री और मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।

बिहार-झारखंड के लिए दो कॉरीडोर 

वहीं,बिहार-झारखंड के लिए दिल्ली-हावड़ा कॉरीडोर पटना को जोड़ेगा। दिल्ली-गुवाहाटी कॉरीडोर यूपी में गोरखपुर से छपरा, कटिहार होते हुए न्यूजलपाईगुड़ी औऱ फिर गुवाहाटी तक जाएगा। 

5 राज्यों को मिलेगा लाभ

इन कॉरीडोर के बनने से बेहतर कनेक्टिविटी होगी औऱ ट्रेनों का लेट होना बंद होगा। रेलमंत्री के मुताबिक देश के रेल नेटवर्क 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, झारखंड,ओडिशा,एमपी और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होते हुए 656 किलोमीटर का अतिरिक्त विस्तार होगा। उनका कहना है कि इस हाईडेंसिटी रेल कॉरीडोर के निर्माण से 4790 गांव के करीब 56 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। 

पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा

रेल मंत्री का कहना है कि इस प्रोजेक्ट्स से तारातारिणी मंदिर, झारसुगुड़ा के जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक, ज्वालेश्वर धाम, अचनकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक और  पर्यटन स्थलों की यात्रा औऱ आसान हो जाएगी।

क्या ट्रेनों की लेटलतीफी खत्म हो जाएगी?

सरकार का लक्ष्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाकर ट्रेनों की आवाजाही को ज्यादा सुचारु बनाना है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि हर ट्रेन की देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। लेकिन अतिरिक्त ट्रैक बनने से ट्रैफिक जाम, क्रॉसिंग और क्षमता की कमी के कारण होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है।

यानी आने वाले वर्षों में दिल्ली से यूपी, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे का सफर ज्यादा सुगम और तेज होने की उम्मीद है।