US Iran War latest Hindi News : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में फिर युद्ध के बादल गहरे मंडराने लगे हैं। पूरे इलाके में भयानक तनाव फैल गया है। आज सुबह यानी 03 नवंबर 2026 को बहुत बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकाने पर हमला कर दिया है। यह कार्रवाई केशम द्वीप पर हुई है, जहां कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह द्वीप विश्व व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित है। यह सैन्य स्ट्राइक ठीक उस दिन हुई है, जब संयुक्त राज्य अमेरिका में मध्यावधि (मिडटर्म) चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे।
ईरान ने भी की धमाकों की पुष्टि
ईरान के सरकारी मीडिया तंत्र ने केशम द्वीप पर हुए इन कई भीषण विस्फोटों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है। समाचार एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक एक अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने जानकारी दी है कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मौजूद कुछ ईरानी ठिकानों को निशाना बनाते हुए यह रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई की है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने बयानों में यह साफ संकेत दिए थे कि वे ईरान के खिलाफ दोबारा हमले करने के विकल्प को खुला रख रहे हैं।
नेतन्याहू का दबाव और ट्रंप की चाल
रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटनाक्रम के पीछे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारी दबाव भी माना जा रहा। नेतन्याहू लगातार ट्रंप पर इस बात का जोर बना रहे थे कि अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन की प्रक्रिया पूरी होते ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए जाएं। इस हमले से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि चुनाव खत्म होते ही ईरान पर फिर से हमले शुरू हो सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया के अपने मित्र देशों और क्षेत्रीय सहयोगियों को पहले ही सतर्क कर दिया था। उन्हें सलाह दी गई थी कि वे अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद होने वाले संभावित हमलों और उसके जवाब में ईरान की ओर से की जाने वाली किसी भी पलटावार कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
सहयोगी देशों में खौफ, महायुद्ध का डर
वैसे, एक तरफ जहां बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका को ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए उकसा रहे, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिका के कई अन्य सहयोगी देश इस सैन्य कदम के सख्त खिलाफ हैं। इन देशों का मानना है कि ईरान पर दोबारा हमला करने से पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा और एक ऐसा भीषण युद्ध शुरू हो सकता है, जिसे संभालना किसी के बस में नहीं होगा। इसके बावजूद मंगलवार की सुबह हुए इस हमले ने साबित कर दिया है कि पश्चिम एशिया में हालात अब काबू से बाहर हो चुके हैं।