विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) 2027 की नीलामी में इस बार फ्रेंचाइजी टीमों का अंदाज पहले से अलग नजर आया। कोच्चि में हुई मिनी ऑक्शन में टीमों ने बड़े नामों पर आंख बंद करके बोली लगाने के बजाय अपनी जरूरत और उपलब्ध बजट को ध्यान में रखकर खिलाड़ियों का चयन किया। नीलामी में कुल 25 खिलाड़ियों को खरीदा गया, जबकि 47 खिलाड़ी अनसोल्ड रह गए। इससे साफ हुआ कि फ्रेंचाइजी अब केवल स्टार खिलाड़ियों के पीछे भागने के बजाय टीम में संतुलन और मजबूत विकल्प तैयार करने पर ध्यान दे रही हैं। इस नीलामी में ऑलराउंडर्स की सबसे ज्यादा मांग रही। खरीदे गए 25 खिलाड़ियों में 13 ऑलराउंडर थे। वहीं, सिर्फ तीन खिलाड़ियों को उनके बेस प्राइस से ज्यादा रकम मिली। इससे टीमों की रणनीति और खर्च को लेकर सतर्कता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 

बड़े नामों के बजाय जरूरत पर रहा टीमों का फोकस

नीलामी में सोफी मोलिन्यू सबसे महंगी खिलाड़ी रहीं। यूपी वॉरियर्स ने उन्हें 1.10 करोड़ रुपये में अपनी टीम से जोड़ा। दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे पर 75 लाख रुपये खर्च किए, जबकि मुंबई इंडियंस ने श्वेता सहरावत को 20 लाख रुपये में खरीदा। इन तीन खिलाड़ियों के अलावा अधिकतर खरीदारी बेस प्राइस पर हुई। इससे पता चलता है कि टीमों ने सीमित बजट में ज्यादा से ज्यादा खाली जगह भरने और अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश की। 

यूपी वॉरियर्स ने सबसे ज्यादा खिलाड़ियों पर लगाया दांव

यूपी वॉरियर्स के पास नीलामी से पहले सबसे बड़ा बजट था और टीम को आठ खिलाड़ियों की जरूरत थी। फ्रेंचाइजी ने सोफी मोलिन्यू के अलावा ग्रेस हैरिस, स्नेह राणा, सुषमा वर्मा, आशा शोभना, कैथरीन ब्राइस, मनाली दक्षिणी और सहाना पवार को खरीदा। ग्रेस हैरिस के आने से टीम के मध्यक्रम को आक्रामकता मिल सकती है। सुषमा वर्मा विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी का विकल्प भी देती हैं। स्नेह राणा और आशा शोभना से स्पिन गेंदबाजी में अनुभव और विविधता मिलेगी। सोफी मोलिन्यू और सोफी एक्लेस्टोन दोनों के टीम में होने से विदेशी खिलाड़ियों के चयन को लेकर टीम मैनेजमेंट को संतुलन बनाना होगा। 

RCB ने जरूरत के मुताबिक किए चार बदलाव

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने नीलामी में चार खिलाड़ियों को खरीदा। टीम ने जेस जोनासन, क्लो ट्रायन, तेजल हसबनिस और वृंदा दिनेश को अपने साथ जोड़ा। जोनासन और ट्रायन के अनुभव से मध्यक्रम को मजबूती मिल सकती है। दोनों खिलाड़ी बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी योगदान दे सकती हैं। वहीं, तेजल हसबनिस और वृंदा दिनेश भारतीय बल्लेबाजी विकल्पों को बढ़ाएंगी। टीम के पास पहले से स्मृति मंधाना, ऋचा घोष और एलिस पेरी जैसे अहम खिलाड़ी मौजूद हैं, इसलिए नीलामी में उसका जोर टीम की गहराई बढ़ाने पर रहा। 

दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे पर खर्च किए 75 लाख

दिल्ली कैपिटल्स ने किरण नवगिरे को 75 लाख रुपये में खरीदकर अपनी सबसे बड़ी बोली लगाई। टीम ने उमा कश्यप, कर्स्टी गॉर्डन और नाजमा खान को भी 10-10 लाख रुपये में खरीदा। किरण की आक्रामक बल्लेबाजी दिल्ली के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। कर्स्टी गॉर्डन गेंदबाजी में विकल्प देंगी, जबकि उमा कश्यप और नाजमा खान टीम की गहराई बढ़ाएंगी। विकेटकीपिंग के लिए मजबूत विकल्प नहीं जोड़ पाना टीम के सामने चुनौती बन सकता है। 

मुंबई इंडियंस ने कम बजट में पूरी की खरीदारी

मुंबई इंडियंस के पास नीलामी से पहले सबसे कम बजट था। इसके बावजूद टीम ने छह खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ा। इनमें श्वेता सहरावत, दिशा कसात, लतिका इनामदार, भारती रावल, सानिका चालके और अक्षिता भगत शामिल हैं। मुंबई ने बड़े नामों पर बड़ी रकम खर्च करने के बजाय अपनी टीम में अतिरिक्त विकल्प तैयार करने पर ध्यान दिया। विकेटकीपिंग विभाग में अनुभव की कमी उसके लिए चिंता का विषय हो सकती है। 

गुजरात जायंट्स ने तीन खिलाड़ियों को खरीदा

गुजरात जायंट्स के पास पहले से ही मजबूत टीम थी और नीलामी में उसे सिर्फ तीन खिलाड़ियों की जरूरत थी। फ्रेंचाइजी ने जी कमलिनी, ओरला प्रेंडरगास्ट और समायरा राघव को खरीदा। कमलिनी के आने से टीम को शीर्ष क्रम में बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग का विकल्प मिलेगा। बेथ मूनी के पहले से टीम में होने के कारण विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी क्रम को लेकर चयन की चुनौती रह सकती है। ओरला प्रेंडरगास्ट ऑलराउंड विकल्प के तौर पर टीम को अतिरिक्त मजबूती दे सकती हैं। 

ऑलराउंडर्स पर सबसे ज्यादा भरोसा

इस बार नीलामी में ऑलराउंडर्स की मांग सबसे ज्यादा रही। कुल 25 खरीदे गए खिलाड़ियों में 13 ऑलराउंडर थे। सात बल्लेबाज, तीन विशेषज्ञ गेंदबाज और दो विकेटकीपर खरीदे गए। इससे संकेत मिलता है कि फ्रेंचाइजी ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में योगदान दे सकें। टी-20 क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ी टीम को कई संयोजन बनाने का मौका देते हैं।

नीलामी के बाद टीमों के सामने नई चुनौती

कोच्चि की नीलामी में सभी फ्रेंचाइजी ने अपनी जरूरतों के अनुसार खिलाड़ियों को चुना, लेकिन असली परीक्षा मैदान पर होगी। नए खिलाड़ियों को पुराने संयोजन में फिट करना और सही प्लेइंग इलेवन तैयार करना टीमों के लिए अहम रहेगा। कुल मिलाकर इस मिनी ऑक्शन में टीमों ने खर्च के साथ-साथ अपनी जरूरतों पर भी ध्यान दिया। अब देखना होगा कि नीलामी में बनाई गई रणनीति आगामी WPL सीजन में कितनी सफल साबित होती है।