बिहार के गलगलिया से दार्जलिंग तक कर सकेंगे फर्राटेदार सफर,  चिकेन नेक फोर लेन हाइवे को मिली मंजूरी

‘आग लागो नकरिया पिया’.... अब पूरब यानि पश्चिम बंगाल कमाने गए कलकतिया बालम के लिए बिहार की महिलाएं बिरह में बिरहा नहीं गाएगी। उनके लिए एक खुशखबरी है। अब उनके राजाजी सिलिगुड़ी से सपाटा भरेंगे और सीधे किशनगंज के गलगलिया लैंड करेंगे। क्योंकि केंद्र सरकार ने 31.02 किलोमीटर लंबे चिकेन नेक कॉरीडोर के लिए 2077.18 करोड़ रुपए स्वीकृत कर दिए हैं।

 बीस अरब की लागत से सिलिगुड़ी कॉरीडोर में बनने वाले इस हाईवे चिकेन नेक के बैक अप की तरह से विकसित किया जाएगा। NH-27 के समानांतर बनने वाले इस राजमार्ग को सिलिगुड़ी कॉरीडोर नंबर 2 भी कहा जा रहा है।    

पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क मजबूत होगा

केंद्र सरकार का मानना है कि इस नए हाइवे के बनने से सेवेन सिस्टर्स कहे जाने वाले पूर्वोत्तर के राज्यों से देश के दूसरे भागों से संपर्क औऱ मजबूत होगा।

कहां से कहां तक होगा ये हाईवे

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपने ट्विटर अकॉउंट से इस हाइवे के निर्माण के लिए 2077.18 करोड़ रुपए की मंजूरी दिए जाने की जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक यह हाईवे सिलिगुड़ी में पानी टंकी औऱ खारीबारी से होते हुए बागडोगरा होते हुए बिहार के गलगलिया तक जाएगा। NH-27 से लगभग 20 से 30 किलोमीटर की दूरी पर इस हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इसका नाम NH-327 रखा जाएगा।

बिहारवासियों के लिए खुशखबरी क्यों

अभी अररिया, पूर्णिया,कटिहार औऱ किशनगंज आने के लिए कोलकाता या साउथ बंगाल से मालदा-फरक्का रूट पकड़ना पड़ता है। या फिर चिकेन नेक कॉरीडोर का NH-27 से गुजरना पड़ता है। सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर भारी यातायात की वजह से बागडोगरा, नक्सलबाड़ी और पानीटंकी जैसे क्षेत्रों में भारी जाम लगता है। अब यह नया फोरलेन हाइवे इस ट्रैफिक को पूरी तरह बाइपास कर देगा। जिससे बंगाल से बिहार तक का के सफर में कई घंटे का वक्त कम हो जाएगा।

सड़क मार्ग के साथ रेलवे कनेक्टिविटी की बड़ी तैयारी

 सिलिगुड़ी के आसपास लगभग 35 किलोमीटर की अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बिछाई जा रही है। तो इधर बिहार में गलगलियां से अररिया तक नई रेल लाइन भी बनाई जा रही है। जिससे राजा जी अपने बंगले तक मज़े-मजे में पहुंच जाएंगे।

वन्य जीवों की सुरक्षा का भी खयाल

इस नए फोरलेन हाइवे को वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। खासकर हाथियों की सुरक्षा के लिए 5 अंडरपास बनाए जा रहे हैं। इनके अलावा तीन बड़े पुल और एक ओवर ब्रिज का भी निर्माण किया जाएगा।

 देश की सुरक्षा से भी जुड़ा है यह हाईवे

दरअसल चिकेन नेक नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर के बेहद करीब है। वहीं चीन औऱ भूटान की सीमाएं ङी लगी हुई हैं। अकसर चिंता जताई जाती है कि चीन चिकेन नेक के करीब आने की कोशिश में है। वह इसे भारत की कमज़ोर नस यानि Achelles' Heel या Choke Point मानता है। क्योंकि  अगर चिकेन नेक किसी कारण से ब्लॉक हो जाता है तो पूर्वोत्तर के सभी राज्य भारत से कट जाएंगे। यहां से सिर्फ 130 किलोमीटर की दूरी पर चीन सीमा के भीतर चुंबी घाटी में 600 से ज्यादा किलेबंद सीमावर्ती गांव बसाए गए हैं। साथ ही हाइस्पीड रेल लाइन औऱ फॉरवर्ड एयर बेस का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। जिसके सीधे निशाने पर चिकन कॉरीडोर है।  2017 में डोकलाम की सैन्य झड़प को इसी षड़यंत्र के तौर पर देखा जाता है। नए राजमार्ग से चिकेन नेक को लेकर भारत पर सामरिक दबाव भी कम हो जाएगा।

एक तरफ देश की सुरक्षा औऱ देशवासियों की सुविधा बढ़ेगी तो दूसरी तरफ गाए जाएंगे मंगल गीत- “सैयां मिले लारटैया माई का कारू”…