मॉस्को में रहने वाले कानपुर के इंजीनियर चंदन गुप्ता को रूसी पुलिस ने हिरासत में लिया था। चंदन पिछले करीब तीन साल से सर्विस वीजा पर मॉस्को में काम कर रहे थे। शनिवार रात करीब साढ़े 12 बजे रूसी पुलिस उनके घर पहुंची। इसके बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। चंदन की पत्नी स्नेहा गुप्ता के मुताबिक, उनके पति ने कोई भी गलती नहीं की थी। इसके बावजूद उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। स्नेहा ने आरोप लगाया कि चंदन पर रूसी आर्मी में शामिल होने का दबाव बनाया जा रहा था।

पत्नी ने सोशल मीडिया पर मांगी मदद

पति के हिरासत में लिए जाने के बाद स्नेहा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने अपनी परेशानी बताई। उन्होंने भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की अपील की। स्नेहा ने बताया कि वह अपने 10 साल के बेटे के साथ परेशान है। मॉस्को में उन्हें वहां की लोकल लैंग्वेज ना आने की वजह से उनके लिए सिचुएशन और मुश्किल हो गई थी। इसके बाद यह मामला इंडियन एम्बेसी तक पहुंचा।

इंडियन एम्बेसी मदद के लिए आई सामने 

मामले की जानकारी मिलने के बाद इंडियन एम्बेसी ने स्नेहा और लोकल अधिकारियों से कॉन्टैक्ट किया। एम्बेसी की तरफ से चंदन को कांसुलर एक्सेस देने की मांग भी की गई। चंदन की कंपनी के अधिकारी भी पुलिस के पास पहुंचे। इस बीच करीब 48 घंटे बाद सोमवार को चंदन को पुलिस की हिरासत से छोड़ दिया गया।  

परिवार को मिली बड़ी राहत

इसके बाद चंदन अपने परिवार के पास लौट आए। कानपुर में उनके पिता महेश गुप्ता ने भी इस पर जानकारी दी। करीब दो दिन की चिंता के बाद परिवार को राहत मिली है, लेकिन चंदन को हिरासत में लेने की असली वजह अभी तक सामने नहीं आई है। उनकी पत्नी ने रूसी आर्मी में जबरन भर्ती किए जाने का आरोप लगाया है। इस आरोप पर रूसी अधिकारियों की तरफ से अभी कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब रूस में इंडियन सिटीजन के रूसी आर्मी से जुड़े होने का मुद्दा पहले से चर्चा में है। भारत सरकार रूस के साथ बातचीत कर ऐसे इंडियंस की सुरक्षित वापसी की कोशिश कर रही है। फिलहाल चंदन अपने परिवार के पास लौट चुके हैं, लेकिन इस मामले के बाद रूस में काम कर रहे इंडियन सिटीजन की सुरक्षा को लेकर कड़े सवाल खड़े हो गए हैं।