Karnataka Government On Ethanol : कर्नाटक सरकार को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बिना स्पष्ट जानकारी के पेट्रोल में अत्यधिक इथेनॉल मिला रही हैं। इसके बाद राज्य के बेंगलुरु समेत कुल सात प्रमुख जिलों से पेट्रोल के 63 सैंपल एकत्र किए गए और एक स्वतंत्र प्राइवेट लैब में इनकी जांच कराई गई। जांच के नतीजों ने सबको चौंका दिया, क्योंकि सभी सैंपलों में इथेनॉल का स्तर सरकार द्वारा निर्धारित 20% (E20) की अधिकतम सीमा से काफी ज्यादा पाया गया।

किस कंपनी के पेट्रोल में कितना मिला इथेनॉल? (लैब टेस्ट आंकड़े)

इंडियन ऑयल: 31.2% से अधिक (सबसे ज्यादा ओवर-ब्लेंडिंग)

हिंदुस्तान पेट्रोलियम: 30.5% और 27%

भारत पेट्रोलियम: 26.5%

नायरा एनर्जी: 26.1%

शेल: 25.5%

कर्नाटक सरकार ने केंद्र से की क्या-क्या मांग ?

जांच रिपोर्ट आने के बाद कर्नाटक सरकार ने केंद्रीय ईंधन एवं पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखकर सख्त कदम उठाने और ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की अपील की है। सरकार की मुख्य मांगें हैं:-

दोषी कंपनियों पर कार्रवाई और जुर्माना : निर्धारित 20% की सीमा का उल्लंघन करने वाली सभी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर भारी जुर्माना लगाया जाए और उनके खिलाफ कड़ा लीगल एक्शन हो।

E20 स्पॉइलेज फंड का गठन : ओवर-ब्लेंडिंग वाला ईंधन इस्तेमाल करने के कारण जिन वाहन चालकों की गाड़ियां खराब या जिनके इंजन क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुआवजा देने के लिए विशेष फंड बनाया जाए।

पेट्रोल पंपों पर डिस्प्ले बोर्ड अनिवार्य हो : देशभर के हर पेट्रोल पंप पर यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए कि दिए जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा कितने प्रतिशत है।

ग्राहकों को चुनने का विकल्प : उपभोक्ताओं को इथेनॉल मिश्रणों (जैसे E10, E20 या प्योर पेट्रोल) में से अपनी पसंद का ईंधन चुनने की आजादी मिले।

पारदर्शिता और स्पष्टीकरण : भारत सरकार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर असल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण सप्लाई की जा रही।

ओवर-ब्लेंडिंग आपके वाहन और जेब के लिए क्यों खतरनाक है?

इथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना है। मगर, पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल मिलाया जाता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इथेनॉल में नमी (पानी) सोखने की प्रवृत्ति होती है। पुरानी गाड़ियों या गैर-E20 कंपैटिबल वाहनों के फ्यूल पाइप, रबर सील, कार्बोरेटर और फ्यूल इंजेक्टर में अत्यधिक इथेनॉल जंग पैदा करता है और उन्हें समय से पहले खराब कर देता है। इथेनॉल की ऊर्जा घनत्व शुद्ध पेट्रोल की तुलना में कम होती है। पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा 20%-30% से अधिक होने पर वाहन का माइलेज काफी गिर जाता है। इससे उपभोक्ता को आर्थिक नुकसान होता है। जब तक पंप पर इथेनॉल का सही प्रतिशत नहीं लिखा होता, तब तक ग्राहक को यह पता ही नहीं चलता कि वह अपनी गाड़ी के लिए उपयुक्त ईंधन ले रहा है या नहीं।