म्यांमार में आतंकवादियों के लिए ट्रेनिंग कैंप चलाने के कथित आरोप में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक इत्तिहाद एय़रलाइन्स से वाशिंगटन रवाना हो गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष एनआईए अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने-अपने देश (अमेरिका और यूक्रेन) जाकर अपने परिवारों से मिलने के लिए एक महीने की अनुमति दे दी है। अदालत ने इन सभी को डिफॉल्ट जमानत देते हुए उनके पासपोर्ट रिलीज करने और एक महीने की अवधि के बाद वापस भारत लौटकर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह मंजूरी कुछ शर्तों और जरूरी कानूनी औपचारिकताओं के साथ दी। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार रात मैथ्यू वैनडाइक को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया और वह अमेरिका के लिए रवाना हो गए।

डिफॉल्ट जमानत मिलने के बाद मिली विदेश जाने की अनुमति

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष एनआईए जज प्रशांत शर्मा ने 24 सितंबर को सातों आरोपियों को एक महीने के लिए देश छोड़ने की अनुमति दी। विशेष एनआईए अदालत ने 18 सितंबर को सभी आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) तय समयसीमा के भीतर इस मामले में अपनी जांच पूरी कर आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं कर पाई थी, जिसके चलते कानूनी प्रावधानों के तहत आरोपियों को यह राहत मिली। यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में जांच एजेंसी को तय अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। आरोपियों के वकील रोहित डांड्रियाल ने भी जमानत के बाद कहा था कि उनके मुवक्किल 180 दिनों से अधिक समय से हिरासत में थे और तय अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण उन्हें वैधानिक जमानत का अधिकार मिला।

एक महीने बाद भारत लौटना होगा

'द इकोनॉमिक टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने आदेश दिया है कि एक महीने की अवधि खत्म होने के बाद सातों आरोपियों को वापस भारत लौटना होगा। देश लौटने के 72 घंटे के भीतर उन्हें इस बात की जानकारी अदालत को देनी होगी। मार्च 2026 में गिरफ्तार किए गए इन सातों आरोपियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक के साथ-साथ छह यूक्रेनी नागरिक—हुर्बा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं।

क्या है म्यांमार ट्रेनिंग कैंप से जुड़ा मामला?

एनआईए के मुताबिक, आरोपियों पर बिना वैध अनुमति के मिजोरम में प्रवेश करने और वहां से अवैध तरीके से म्यांमार पहुंचने का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी का आरोप था कि वहां उन्होंने म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध से जुड़ी ट्रेनिंग दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ यूएपीए की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में एनआईए की पहली चार्जशीट में इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया। एजेंसी ने बाद में स्पष्ट किया था कि आतंकवाद से जुड़े आरोप समाप्त नहीं किए गए हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल

आरोपियों की रिहाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नागरिक और उसके साथियों की रिहाई के पीछे अमेरिका का दबाव हो सकता है। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि विदेशी नागरिकों को भारत का वीजा किस आधार पर मिला और वे भारत के रास्ते म्यांमार तक कैसे पहुंचे। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी अधिकारियों ने भारतीय अधिकारियों के सामने मैथ्यू वैनडाइक की हिरासत का मुद्दा उठाया था। रमेश ने आरोप लगाया कि बाद में यूएपीए से जुड़े आरोपों में बदलाव हुआ और आरोपियों को विदेश जाने की अनुमति मिल गई।कांग्रेस ने केंद्र से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पूरे मामले में सुरक्षा और वीजा प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाए गए थे। अमेरिकी दबाव से रिहाई के संबंध में कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञ ने फैसले पर जताई आपत्ति

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने भी सोशल मीडिया पर आरोपियों को विदेश जाने की अनुमति दिए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक सवालों से जोड़ते हुए अपनी चिंता जाहिर की। चेलानी ने दावा किया कि मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों का संबंध एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से था और ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों में उनकी भूमिका की जांच की जा रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विदेशी दबाव के कारण भारत में चर्चित मामलों में कार्रवाई कमजोर पड़ने के उदाहरण सामने आते रहे हैं। चेलानी के इन दावों और अमेरिकी दबाव के आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। इस मामले में अदालत की ओर से दी गई राहत का आधार फिलहाल डिफॉल्ट जमानत और उसके बाद विदेश जाने की अनुमति से जुड़ा है।