India Next CJI justice Vikram nath News : भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस विक्रमनाथ बनने जा रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी तक है। जस्टिस नाथ ने साल 1986 में लखनऊ यूनिवर्सिटी अंतर्गत शिया पीजी कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। पढ़ाई पूरी करने के अगले ही साल यानी 1987 में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 17 वर्षों तक बतौर अधिवक्ता काम करने के बाद 2004 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया। दो साल बाद 2006 में उनकी नियुक्ति स्थायी न्यायाधीश के तौर पर हो गई।

गुजरात हाईकोर्ट में रहते हुए शुरू हुई नई पहल

न्यायिक कॅरियर में आगे बढ़ते हुए जस्टिस विक्रमनाथ गुजरात हाईकोर्ट में मुख्य जज भी बने। उनके कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण पहल अदालत की कार्यवाही को आम लोगों तक पहुंचाने से जुड़ी रही। उनके नेतृत्व में गुजरात हाईकोर्ट की सुनवाई को लाइव स्ट्रीम करने की व्यवस्था शुरू हुई। अगस्त 2021 में जस्टिस विक्रमनाथ को सर्वोच्च अदालत का जज बनाया गया। अब वे देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर पहुंचने जा रहे हैं।

शिया कॉलेज को दिया अपनी सफलता का श्रेय

जस्टिस विक्रमनाथ का अपने शिक्षण संस्थान से जुड़ाव भी खास रहा है। एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने करियर में शिया कॉलेज की भूमिका का जिक्र करते हुए संस्थान को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया था। उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें इस संस्थान में पढ़ने का अवसर नहीं मिला होता तो शायद वे इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते। लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी उनके योगदान और उपलब्धियों को सम्मान दिया है। वर्ष 2018 में उन्हें विश्वविद्यालय की ओर से विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान दिया गया था। जस्टिस विक्रमनाथ के परिवार का शिक्षा के क्षेत्र से भी गहरा संबंध है। उनकी पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव शिक्षाविद हैं। वो इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति हैं।

100 साल से ज्यादा पुरानी लॉ फैकल्टी की लंबी विरासत

लखनऊ विश्वविद्यालय की कानून शिक्षा की परंपरा भी काफी पुरानी है। विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी की स्थापना 1921 में जग मोहन नाथ चक ने की थी। एक सदी से अधिक समय में इस संस्थान ने न्यायिक व्यवस्था को कई महत्वपूर्ण नाम दिए हैं। इस फैकल्टी से पढ़ाई करने वाली प्रमुख हस्तियों में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एएस आनंद, पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सगीर अहमद और जस्टिस ब्रजेश कुमार का नाम शामिल है। कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में फैकल्टी के पूर्व डीन प्रो. आरयू सिंह का भी उल्लेख महत्वपूर्ण है। उन्होंने नेपाल के संविधान के प्रारूप को तैयार करने में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की कानून शिक्षा व्यवस्था को विकसित करने में भी उनका योगदान बताया जाता है।

जस्टिस विक्रमनाथ की पत्नी से जुड़ा विवाद क्या है?

जस्टिस विक्रमनाथ की पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति हैं। उनकी नियुक्ति की पात्रता पर सवाल उठते रहे हैं। 2022 में एक याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रो. संगीता ने कुलपति पद के आवेदन में अनुभव से जुड़े गलत जानकारियां दी थीं। इस पर अदालत ने उनसे जवाब मांगा था। दिसंबर 2022 में कांग्रेस सांसद राजमणि पटेल ने संसद में उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि उनके पास आवश्यक 10 वर्षों का अनुभव नहीं था। यह भी आरोप लगाया कि जस्टिस विक्रमनाथ की पत्नी होने के चलते उन्हें हटाया नहीं गया। हालांकि, इस महीने प्रो. संगीता श्रीवास्तव को कुलपति के रूप में दूसरा पांच साल का कार्यकाल दिया गया है।