जंतर-मंतर पर हो रहे "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) के छात्र आंदोलन के दौरान रुचिका सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें वो पीएम मोदी पर टिप्पणी करती हुई और उनके लिए अपशब्द इस्तेमाल करती हुई नजर आ रही थी। उस 15 साल की बच्ची का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। कोर्ट ने इस पूरे मामले को सहजता और गंभीरता से लेते हुए आदेश दिया है कि किसी भी बच्ची के साथ ऐसे हिंसा या टॉर्चर बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान सुर्खियों में आने वाली 15 साल की नाबालिग छात्रा रुचिका सिंह का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपशब्द बोलने के आरोप में उस पर FIR जारी की गई थी। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की स्पोक्सपर्सन और वकील रत्ना सिंह ने परिवार की सहायता के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया और लगातार उनके साथ संपर्क में हैं। उनका कहना है कि मामला सामने आने के बाद से छात्रा और उसके परिवार वालों को लगातार परेशान किया जा रहा है और उन पर हमले किए जा रहे हैं। वकील रत्ना सिंह का ये भी कहना है कि दक्षिण पंथ के कई गुंडे उन पर हमले का प्रयास और उनके घर पर पत्थरबाजी तक कर रहे हैं, जिससे डरकर उन्हें अपने बचाव के लिए दिल्ली छोड़कर नॉएडा शिफ्ट होना पड़ा। वकील रत्न सिंह ने कोर्ट में ये भी कहा कि वीडियो में नजर आ रहे बाकी लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उल्टा इस 15 साल की बच्ची पर FIR दर्ज कर दी गई। उनके मुताबिक, ये सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के भी खिलाफ है।
जस्टिस सूर्यकांत और उनकी पीठ की मामले में एंट्री!
रुचिका सिंह का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद कोर्ट ने इस पर गंभीरता से संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने केस की सुनवाई के दौरान कहा- 'अगर उसकी शिकायत में थोड़ी भी सच्चाई है, तो लड़की और उसके परिवार की सुरक्षा के लिए कुछ एहतियाती उपाय किए जाने चाहिए।' कोर्ट का कहना है कि किसी भी बच्चे को ऐसी हिंसा का सामना नहीं करना चाहिए और दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वो कोई भी हो। बेंच ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि अगर उन पर हमला करने वाले उपद्रवी खुलेआम बाहर घूम रहे हैं और डरा धमका रहे हैं, तो इस मामले की सुनवाई में बिल्कुल देरी नहीं होनी चाहिए।
UP सरकार ने डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को किया सस्पेंड
सुनवाई के दौरान एक और गंभीर मुद्दा उठा था। UP सरकार ने गुरुवार को कोर्ट में बताया कि उस डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को भी सस्पेंड कर दिया गया है, जिसने नोएडा में हुए NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ हो रहे प्रोटेस्ट में शामिल हुए एक लॉ स्टूडेंट को 'पीस बॉन्ड' नाम का नोटिस जारी किया था। इस कार्रवाई में सरकार ने ये बात साफ की कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की कोई भूमिका ही नहीं थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ये बात सरकार की तरफ से स्पष्ट की थी। ये मामला तब सामने आया था जब पहले से ही सुप्रीम कोर्ट FIR और प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर अपने सख्त निर्देश दे चुका था।
कोर्ट का दोनों सरकारों को आदेश
रुचिका सिंह के वकील ने बताया कि उसने अपने परिवार पर हो रहे हमले की पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस को छात्र और उसके परिवार को सुरक्षा प्राप्त करने के निर्देश दिए। वहीं, दिल्ली पुलिस को मामले से जुड़ी FIR की जांच होने के बाद स्टेटस रिपोर्ट देने को भी बोला गया। बेंच मेंबर जस्टिस बागची ने भी FIR पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की बात रखी। पुलिस ने फिर रुचिका के पिता पर हुए हमले की दर्ज हुई फिर में SC/ST एक्ट (अत्याचार निवारण) की धाराएं जोड़ीं और उन पर हमला करने वाले व्यक्ति, स्वतन्त्र भारद्वाज को हाल ही में बुलंदशहर से गिरफ्तार भी कर लिया।
परिवार को तूफान के बीच राहत की सांस
रुचिका सिंह के वकीलों में से एक रत्ना सिंह लगातार परिवार के साथ संपर्क में हैं और सुनिश्चित कर रही हैं कि उनकी मदद हर तरह से की जाए और रुचिका सिंह की काउंसलिंग का इंतजाम भी हो। हालांकि, परिवार का कहना है कि सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद से उनको लगातार मैसेज और कॉल्स आ रहे हैं, जिसने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। क्योंकि रुचिका नाबालिग है इसलिए उसके सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों की खास तौर से निगरानी होनी चाहिए। वकील ने इस चीज से बचने की कोर्ट से अपील भी की है।