Dularchand Murder Case : बिहार के मोकामा से विधायक एवं बाहुबली अनंत सिंह की कानूनी परेशानियां फिर बेहद गंभीर मोड़ पर आ खड़ी हैं। चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने जांच एजेंसियों को पूरे मामले की तफ्तीश 4 महीनों में मुकम्मल करने के सख्त आदेश दिए हैं।
मार्च में मिली थी जमानत
यह कानूनी झटका दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर आया है। दरअसल, मार्च में पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को राहत मिली थी और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था। वैसे, पीड़ित परिवार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय आरोपी के लंबे आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए सरेंडर का फरमान सुना दिया। अदालत की कार्यवाही के दौरान अनंत सिंह की तरफ से उनकी बेटी की शादी का हवाला देकर सरेंडर से छूट या मोहलत की गुहार लगाई गई थी। वैसे, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मानवीय याचिका को भी खारिज कर दिया और उन्हें तय म्याद के भीतर ही जेल लौटने के निर्देश दिए।
क्या था दुलारचंद यादव हत्याकांड?
यह घटनाक्रम बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान का है, जब मोकामा टाल इलाके में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में दुलारचंद यादव चुनाव प्रचार में जुटे थे। इसी दौरान प्रचार करते समय उनका सामना अनंत सिंह के काफिले से हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तनातनी शुरू हो गई, जिसने जल्द ही हिंसक रूप ले लिया। घटनास्थल पर जमकर अंधाधुंध गोलीबारी हुई। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि दुलारचंद यादव की मौत गोली लगने से हुई है। लेकिन बाद में जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक उनकी मौत किसी वाहन से जोरदार टक्कर लगने और छाती व दिल पर गंभीर चोट आने के कारण हुई थी। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह समेत 80 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पटना के बेऊर जेल भेज दिया था। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में इलाके के दो थाना प्रभारियों को भी निलंबित कर दिया गया था।
चौतरफा घिरे अनंत सिंह
एमएलसी चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी रुख अपनाने और जदयू उम्मीदवार का विरोध करने के कारण पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश भी की है। इसके अलावा प्रशासन ने उनकी पत्नी नीलम देवी को पटना स्थित मॉल रोड का सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया है। एक तरफ जदयू से बेदखली और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद छोटे सरकार नाम से मशहूर अनंत सिंह के लिए आगे की राजनीतिक और कानूनी राह बेहद मुश्किल भरी दिख रही है।