दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने राजधानी की खराब हवा पर व्यंग्य करते हुए टिप्पणी की, "उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।" अदालत ने पराली जलाने के साथ-साथ वाहनों से निकलने वाले धुएं और कचरा जलाने को भी प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल बताया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी मौजूद रहे। मामले में अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने बताया कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर अब भी गंभीर श्रेणी के करीब बना हुआ है।
'रोज 30 सिगरेट पीने जैसा है प्रदूषण'
अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि प्रदूषित हवा का असर अब लोगों की सेहत के साथ आवाज पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज भी बैठ रही है और मौजूदा हालात में सांस लेना रोजाना 30 सिगरेट पीने जैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत रही। सिंह के मुताबिक, दिल्ली पहले से ही प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है और पराली जलने से स्थिति और बिगड़ जाती है। उन्होंने स्थानीय प्रदूषण के स्रोतों पर भी प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।
वाहनों को प्रदूषण का बड़ा कारण बताया
सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने परिवहन को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वाहनों के अलावा ऊर्जा उत्पादन और कचरा जलाने से भी प्रदूषण फैल रहा है। ऐसे में केवल पराली पर ध्यान देने के बजाय स्थानीय स्रोतों पर भी काम करना जरूरी है। अदालत ने भी वाहनों और निजी गाड़ियों से होने वाले उत्सर्जन पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि दिल्ली और एनसीआर को जोड़ने वाली सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन चलते हैं। प्रदूषण पर चर्चा करते समय इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने तत्काल, मध्यम अवधि और लंबे समय के उपायों की जरूरत पर जोर दिया।
अगली बुवाई तक पराली प्रबंधन जरुरी
सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को समय रहते आर्थिक प्रोत्साहन और जरूरी सुविधाएं देने की आवश्यकता बताई। अदालत ने सुझाव दिया कि फसल अवशेष की खरीद के लिए कीमतों की घोषणा पहले ही कर दी जानी चाहिए, ताकि किसानों को पराली बेचने का विकल्प मिल सके। पीठ ने ग्राम पंचायतों को भी पराली इकट्ठा करने और उसके प्रबंधन के लिए जरूरी मशीनरी और व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही। अदालत ने उम्मीद जताई कि अगली बुवाई के मौसम तक पराली जलाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
16 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल बयान और सुझाव देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीन पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अदालत इस मामले में कुछ निर्देश जारी करेगी और दिवाली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से निपटने की रणनीति में पराली के साथ परिवहन, ऊर्जा, कचरा जलाने और अन्य स्थानीय स्रोतों को भी शामिल करना होगा।