उत्तर प्रदेश और बिहार में विधान परिषद (MLC) चुनाव के दौरान कथित बूथ कैप्चरिंग, फर्जी मतदान, बैलेट पेपर में गड़बड़ी और मारपीट के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सत्तारूढ़ दलों और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ। इस चुनावी प्रक्रिया के अंतर्गत पाँच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के साथ-साथ छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को भी शामिल किया गया था। वहीं, बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर वोट डाले गए। मतदान के दौरान अलग-अलग जगहों से विवाद और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आईं। 

अखिलेश यादव का आरोप- फतेहपुर में बूथ कब्जाने की कोशिश

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में मतदान केंद्र पर कथित तौर पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर कथित गड़बड़ियों के वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े लोग और कुछ अधिकारी सपा समर्थकों को मतदान करने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इन घटनाओं से जुड़े सबूत संबंधित अधिकारियों के सामने रखेगी और कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग करेगी। सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। ये आरोप फिलहाल राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए हैं; इनकी पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार है। 

आगरा, मुजफ्फरनगर और अन्य जिलों में भी विवाद

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बीजेपी और सपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की खबरें सामने आईं। आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र में मतदान केंद्र के अंदर लोगों के प्रवेश को लेकर हंगामा हुआ। सपा की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ लोगों ने बूथ में प्रवेश कर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में बैलेट पेपर पर निशान लगाए। मुजफ्फरनगर में भी दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव की खबर आई, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। फतेहपुर के विजयपुर ब्लॉक कार्यालय स्थित एक मतदान केंद्र पर भी विवाद हुआ। सपा प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं को मतदान केंद्र से दूर किया गया और सीसीटीवी कैमरे बंद थे। रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने सीसीटीवी बंद होने के आरोप से इनकार किया और मतदान जारी रहा। इन घटनाओं के बीच सपा ने कहा कि वह कथित गड़बड़ियों के वीडियो और अन्य सबूत जुटाकर चुनाव आयोग से शिकायत करेगी। 

बिहार में तेजस्वी यादव ने लगाए फर्जी वोटर जोड़ने के आरोप

बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने विधान परिषद चुनाव में कथित रूप से जाली मतदातों के नाम सम्मिलित करने का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा उसमें अनुचित हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रही है। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं की गई हैं। तेजस्वी ने प्रशासन पर सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवारों के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनावी गतिविधियों पर नजर रख रही है और उसे कई मतदान केंद्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। बीजेपी की ओर से इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठे सवालों पर संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष अहम होंगे। 

RJD उम्मीदवार के घर पुलिस पहुंचने पर भी विवाद

बिहार में पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से RJD उम्मीदवार संजीव कुमार सिंह ने भी चुनाव के दौरान प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। उनका दावा था कि पुलिस बिना वारंट उनके आवास पर पहुंची और उन्हें परेशान करने की कोशिश की। तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को डराने के लिए प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरी ओर, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस कार्रवाई के पूरे विवरण का इंतजार है। 

मतदाता सूची की गड़बड़ियों ने बढ़ाई चिंता

उत्तर प्रदेश में मतदान से पहले मतदाता सूची में नामों और अन्य विवरणों की गलतियों को लेकर भी विवाद सामने आया था। चुनावी रिकॉर्ड की 14.81 लाख से अधिक प्रविष्टियों में से 158 में गड़बड़ियां मिलने की रिपोर्ट आई थी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इन गलतियों के पीछे सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या और अधिकारियों की लापरवाही की संभावना जताई थी। मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों और मतदान के दिन सामने आए आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी। मतदाता सूची में त्रुटि होना और मतदान में जानबूझकर धांधली होना अलग-अलग मामले हैं। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित शिकायतों, उपलब्ध सबूतों और जांच के परिणामों को देखना जरूरी होगा। 

27 अक्टूबर को होगी मतगणना

उत्तर प्रदेश और बिहार के विधान परिषद चुनावों की मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। मतदान के दौरान सामने आए आरोपों के बाद अब चुनाव आयोग और संबंधित प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। विपक्षी दलों ने शिकायतों की जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इन चुनावों को 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुकाबले के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। MLC चुनावों के नतीजों और विधानसभा चुनावों के परिणामों के बीच सीधा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।