US Suspends IT Companies : वाशिंगटन से भारतीयों के लिए चिंताजनक खबर आई है। डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने स्थायी रोजगार मंजूरी (PERM) देने वाली लिस्ट से 8 बड़ी आईटी कंपनियों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है। जिन कंपनियों कार्रवाई हुई है, उनमें भारत की प्रमुख टेक कंपनियां-जैसे टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी शामिल हैं। साथ ही अमेरिकी टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट और एडोब के विरुद्ध कार्रवाई की गई। प्रशासन का आरोप है कि ये संस्थान स्थानीय श्रम बाजार के हितों को नजरअंदाज कर रहे। अमेरिकी नागरिकों के हक के पदों पर बाहर से आए कर्मियों को तरजीह दी।

न नए कागजात जमा होंगे, न पुराने आगे बढ़ेंगे

अमेरिकी श्रम विभाग के प्रतिनिधि सॉन्डरलिंग के मुताबिक यह निलंबन लागू हो चुका है। मतलब इन कंपनियों के किसी नए PERM आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खासकर माइक्रोसॉफ्ट के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि 2025 में कंपनी ने योग्य स्थानीय लोग नहीं मिलने की बात कहकर 6 हजार अमेरिकी कर्मियों की छंटनी की थी। वैसे, उस दौरान कंपनी ने 6000 से अधिक एच-1बी वीजा पाए और PERM के तहत 3682 अर्जियां दाखिल कीं। इनमें से 1000 पद वही थे, जिन पर से अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था।

विदेशी वर्क परमिट पर जंग क्यों?

श्रम विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 2009 के बाद से इन कंपनियों ने 30 लाख विदेशी कार्यबल के लिए आग्रह भेजा था। इसके तहत उन्हें 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा स्वीकृतियां और 1 लाख से ज्यादा PERM मंजूरियां मिलीं। चूंकि हर साल जारी होने वाले कुल एच-1बी वीजा का 70% से अधिक हिस्सा भारतीय पेशेवरों के खाते में जाता है, इसलिए PERM प्रक्रिया पर लगी यह रोक भारतीय टेक पेशेवरों के भविष्य पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है।

नामी विश्वविद्यालयों पर भी कस रहा शिकंजा

जेडी वेंस का कहना है कि येल, हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, कैलटेक समेत 9 वर्ल्ड फेमस ऑर्गनाइजेशन में संचालित जे-एक वीजा कार्यक्रम की जांच होगी। जे-1 वीजा मुख्य रूप से विदेशी रिसर्चर और प्रोफेसरों के लिए होता है। दरअसल, सरकार को अंदेशा है कि विश्वविद्यालय इस प्रावधान का अनुचित लाभ उठाकर घरेलू रिसर्चर और स्नातकों के वेतन स्तर को प्रभावित कर रहे।

धांधली रोकने को विशेष जांच दल का गठन

अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी एस्पोसिटो ने कहा है कि नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। संस्थान कितना बड़ा या उसका राजनीतिक-सामाजिक रसूख कितना भी हो, उसे राहत नहीं मिलेगी। वीजा प्रक्रियाओं में किसी भी किस्म की अनियमितता की जांच के लिए सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों को मिलाकर एक विशेष जांच कार्यबल गठित किया जा रहा है।