केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को एक खुशखबरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य की वेतन सीमा 15 हजार रुपए प्रति माह से बढ़ा कर 25 हजार रुपए तक किए जाने का फैसला लिया है। समझा जा रहा है कि सरकार के इस निर्णय से निजी सेक्टर के लगभग 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य पीएफ औऱ पेंशन पाने के अधिकारी हो जाएंगे।
अनिवार्य कवरेज के मायने
ईपीएफओ के अनुसार अनिवार्य कवरेज से आशय है कि किसी इंप्लॉई की बेसिक सेलेरी औऱ डीए यानि महंगाई भत्ता की तय सीमा है, जिसमें कवर किए जाने वाले कर्मचारी को कानूनन ईपीएफ यानि भविष्य निधि औऱ ईपीएस यानि कर्मचारी पेंशन स्कीम में शामिल करना अनिवार्य होगा। इससे पहले 15 हजार रुपए या उससे कम बेसिक सेलेरी+DA पाने वाले इंप्लॉई को ही इन स्कीमों में सम्मिलित किया जाता था। लेकिन अब सीमा बढ़ा कर 25 हजार कर दी गई है।
नए नियम के तहत अब 25 हजार रुपए तक बेसिक सेलेरी+ डीए पाने वाले कर्मचारी भी अब ईपीएफ और ईपीएस का फायदा ले सकेंगे।
प्राइवेट सेक्टर के इंप्लॉईज़ को तीन बड़े फायदे
रेगुलर सेविंग: BASIC और DA में इंप्लॉई औऱ एंप्लॉयर दोनों 12-12 फीसदी कंट्रीब्यूट करते हैं। उनका योगदान EPF अकॉउंट में जमा किया जाता है और सेवानिवृत्ति पर एक बड़ी राशि के रूप में कर्मचारी को दिया जाता है।
रिटायरमेंट पेंशनः इंप्लॉयर के कंट्रीब्यूशन एक हिस्सा EPS में जमा किया जाता है। जो रिटायरमेंट के बाद मंथली पेंशन के रूप में मिलता है।
कैसे तय होती है पेंशन
पेंशन का सीधा फार्मूला है- पेंशनेबलसेलेरी x पेंशनेबल सर्विस ÷ 70 = मंथली पेंशन
पेंशनेबल सेलेरीः अमूमन आखिरी 60 महीनों की एवरेज सेलेरी को पेंशनेबल सेलेरी माना जाता है।लेकिन पहले यह अधिकतम 15000 रुपए मानी जाती थी। लकिन अब यह लिमिट बढ़ने से औसत सेलेरी 25 हजार तक होने की संभावना है।
पेंशनेबल सर्विसः EPS में कम से कम 10 साल की सर्विस ज़रूरी मानी जाती है। अलग-अलग कंपनियों में सर्विस जोड़ कर भी दस साल हो तो पेंशनेबल सर्विस मानी जाती है।
मिसाल के तौर पर अगर 15000 की पेंशनबेल सेलेरी वाले कर्मचारी की 35 साल की सर्विस है तो उसकी मंथली पेंशन 7,500 रुपए होगी। नई वेज सेलेरी 25 हजार तय होने के बाद पेंशन की राशि में भी इज़ाफा होना लगभग तय माना जा रहा है।
क्या इन-हैंड सेलेरी पर भी होगा असर
अनिवार्य कवरेज बढ़ने से मंथली कटौती भी बढ़ सकती है। क्योंकि पीएफ कंट्रीब्यूशन की गणना अब अपर लिमिट तक होगी। पहले 15 हजार रुपए की लिमिट पर 12 परसेंट इंप्लाई कंट्रीब्यूशन 1,800 बनता था। लेकिन अब 25 हजार की अपर लिमिट होने से यह कंट्रीब्यूशन 3000 रुपए होगा। लिहाजा इन-हैंड सेलेरी पहले के मुकाबले कुछ कम हो सकती है।
किन इंप्लॉईज़ को मिलेगा फायदा
यह लिमिट 15 हजार रुपए तक की बेसिक सेलेरी+डीए पर लागू होती है, पूरी CTC या ग्रॉस सेलेरी पर लागू नहीं होती। सरकार का मकसद निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क का विस्तार करना है। ईपीएफओ के आंकड़ों के मुताबिक 15 हजार से 25 हजार तक की मंथली सेलेरी वाले सेगमेंट में बड़ी संख्या के कर्मचारी हैं, जो अब तक इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। सरकार का अनुमान है कि लगभग निजी क्षेत्र 51 लाख कर्मचारी और ईपीएफओ की सोशल सिक्योरिटी स्कीम्स, EPF,EPS औऱ EDLI के लाभार्थी हो जाएंगे।