Delhi CJP Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लेने का सिलसिला रविवार को भी जारी रहा। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस के आसपास से करीब 100 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें CPI(M) नेता जॉन ब्रिटास भी शामिल थे। प्रदर्शनकारी अपना विरोध फिर से शुरू करने के लिए वहां जुटे थे। 

यह एक्शन सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद हुआ, जिसमें कहा गया था कि शांतिपूर्ण और बिना हथियार वाले प्रदर्शनकारियों को केवल कानून में निर्धारित प्रोसेस के तहत ही डिटेन किया जा सकता है। कनॉट प्लेस में भीड़ बढ़ने के साथ ही आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास भी कई खाली बसें देखी गईं। इन बसों का इस्तेमाल हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने के लिए किया जा रहा था।

मेट्रो और इंटरनेट सेवा नहीं रोकने के निर्देश 

रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को केवल कानून में तय प्रक्रिया के तहत ही हिरासत में लिया जा सकता है। अदालत ने यह निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने, आवाजाही रोकने, इंटरनेट सेवाओं में बाधा डालने और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने के आरोप लगाए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलाने, इंटरनेट कनेक्टिविटी बनाए रखने और लोगों की आवाजाही बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही, अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालत परिसरों के आसपास प्रतिबंधों से जुड़े नोटिस हटाने का निर्देश दिया, ताकि लोगों को न्याय पाने में कोई बाधा न हो।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

हिरासत में लिए गए CPI(M) नेता जॉन ब्रिटास ने पत्रकारों से कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई बुनियादी नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि विरोध को रोकने की कोशिशों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा और इससे प्रदर्शनकारियों का संकल्प और मजबूत होगा।

ब्रिटास ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य नेताओं को हिरासत में लेने के लिए पुलिस के विमान में प्रवेश करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि पुलिस को विमान में चढ़ने की इतनी जल्दी क्यों थी और क्या प्रदर्शनकारी कोई अपहरणकर्ता थे।

हिरासत में लिए गए एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह इलाके में शांतिपूर्वक खड़ा था। नाम न बताने की शर्त पर उसने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है और सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में क्यों लिया जा रहा है और उनके साथ मारपीट क्यों की जा रही है।