LRS Remittances 2026 : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की उदारीकृत प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme-LRS) के तहत देश से बाहर पैसा भेजने के मामले में एक नया रिकॉर्ड सामने आया है। साल 2026 के शुरुआती आठ महीनों (जनवरी से अगस्त) के दौरान भारतीय नागरिकों ने कुल $20.09 अरब (1.88 लाख करोड़ रुपये) की राशि विदेशों में भेजी है। 2025 की इसी अवधि में यह आंकड़ा 1.80 लाख करोड़ रुपये रहा था। विदेशों में पैसा भेजने की इस दर में 5.26% का उछाल दर्ज किया गया है। यह वृद्धि दर्शाती है कि विदेशी मुद्रा की बढ़ती जरूरतों के बीच भारतीय निवासियों का रुझान विदेशों में धन भेजने की ओर तेजी से बढ़ा है। आर्थिक विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी मुद्रा के इस भारी बहाव को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा LRS सीमा पर सख्ती या नए प्रतिबंध लगाने की चर्चाओं को एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।

विदेशों में यात्रा और छुट्टियां बिताने पर सबसे ज्यादा खर्च

LRS के तहत विदेशों में भेजे जा रहे फंड का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी यात्राओं पर खर्च हो रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच सिर्फ ट्रैवल कैटेगरी के तहत $10.96 अरब बाहर भेजे गए, जो कुल एलआरएस खर्च में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है। पिछले साल इसी अवधि के दौरान ट्रैवल पर $10.67 अरब खर्च हुए थे। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में यात्रा से जुड़ा प्रेषण $1.658 अरब रहा, जो अगस्त 2026 में $1.63 अरब दर्ज किया गया। इस ट्रैवल कैटेगरी में अंतरराष्ट्रीय छुट्टियां, व्यावसायिक यात्राएं, धार्मिक यात्राएं (तीर्थयात्रा), इलाज और पढ़ाई के लिए की जाने वाली यात्राएं शामिल हैं। क्रेडिट कार्ड से विदेशों में किए जाने वाले लेन-देन भी इसी श्रेणी का बड़ा हिस्सा हैं।

पढ़ाई और विदेशी निवेश में भारी उछाल

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक विदेश में शिक्षा और हॉस्टल खर्च से जुड़ा प्रेषण मार्च 2026 के $450.16 मिलियन से लगभग दोगुना होकर अगस्त 2026 में $855.52 मिलियन तक पहुंच गया। वहीं, छुट्टियों और अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड पेमेंट समेत अन्य यात्रा खर्च मार्च के $623.05 मिलियन से बढ़कर अगस्त में $713.80 मिलियन हो गए। भारतीय निवासियों द्वारा विदेशी शेयरों (इक्विटी) और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में किए जाने वाले निवेश में भी जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त 2026 को समाप्त आठ महीनों में कुल विदेशी निवेश $2.61 अरब रहा, जो पिछले साल के $1.40 अरब की तुलना में सीधे 86% की बड़ी बढ़ोतरी को दिखाता है। यह निवेश जनवरी 2026 के $178.8 मिलियन से बढ़कर अगस्त 2026 में $321.5 मिलियन तक पहुंच गया।

वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े और अगस्त का हाल

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो ट्रैवल श्रेणी के तहत कुल $16.438 अरब देश से बाहर भेजे गए थे। इसके बाद दूसरे स्थान पर विदेश में रह रहे करीबी रिश्तेदारों का रखरखाव ($3.539 अरब) और तीसरे स्थान पर शेयर व बॉन्ड बाजार में निवेश ($2.652 अरब) रहा था। केवल अगस्त 2026 के आंकड़े देखें तो इस एक महीने में कुल $2,738.58 मिलियन ($2.73 अरब) बाहर भेजे गए, जिनमें से अकेले ट्रैवल प्रेषण का हिस्सा $1,630.26 मिलियन (लगभग 60%) था। विदेशी शेयर और डेट निवेश में $321.53 मिलियन तथा परिजनों के रखरखाव पर $275.43 मिलियन खर्च हुए। अगस्त महीने में इन तीनों प्रमुख श्रेणियों ने मिलकर कुल $2.227 अरब की हिस्सेदारी दर्ज की।

LRS योजना क्या है?

RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत भारत में रहने वाला कोई भी नागरिक एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान अपनी जरूरत के हिसाब से अधिकतम $2,50,000 (ढाई लाख अमेरिकी डॉलर) तक की राशि वैध चालू खाते या पूंजीगत खाते के लेन-देन के लिए बिना किसी विशेष मंजूरी के विदेशों में भेज सकता है।