MP Sudhakar Singh News : बिहार के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इस समय भारी हलचल मची है। बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह और 1994 बैच के तेजतर्रार सीनियर IPS अधिकारी एवं DG कुंदन कृष्णन के बीच की जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। 5 करोड़ के मानहानि का नोटिस मिलने के बाद RJD सांसद ने मोर्चा खोल दिया है। सुधाकर सिंह की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस पूरे विवाद की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। आज पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद सुधाकर सिंह ने DG कुंदन कृष्णन पर बेनामी संपत्ति अर्जित करने के कई गंभीर और चौकाने वाले आरोप लगाए। सांसद ने दावा किया कि कुंदन कृष्णन ने अपनी पूरी सर्विस के दौरान वेतन के रूप में 3 करोड़ रुपए कमाए हैं, लेकिन मौजूदा समय में उनके पास 150 करोड़ की संपत्ति है।
और क्या-क्या आरोप लगाए सांसद?
सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि IPS अफसर ने अपने करीबी रितेश रंजन सिंह उर्फ बिट्टू सिंह के नाम पर 200 करोड़ रुपए की संपत्तियां खरीदी हैं। उन्होंने दावा किया कि कुंदन कृष्णन और उनकी पत्नी के नाम पर (पैतृक संपत्ति को छोड़कर) घोषित संपत्ति ही 87 करोड़ की है। सांसद ने आरोप लगाया कि कुंदन कृष्णन ने पटना में अपने पद (पूर्व SSP) पर रहते हुए काली कमाई से दूसरों के नाम जमीनों के सौदे किए। शेयर बाजार में भी 36 लाख के संदिग्ध निवेश पर सवाल खड़े किए गए। सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से इन सभी आर्थिक अनियमितताओं और संपत्तियों की गहन जांच कराने तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। सांसद ने राज्य में पिछले तीन साल से लोकायुक्त की नियुक्ति न होने पर भी सवाल उठाए।
एनकाउंटर से शुरू हुआ पूरा विवाद
पूरे विवाद की जड़ 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर स्थित बिलौटी गांव में हुआ भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर है। 24 जून 2026 को सांसद सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि STF के प्रभारी कुंदन कृष्णन ने ही योजना बनाकर एसटीएफ की टीम से भरत तिवारी का एनकाउंटर करवाया था। सांसद के इस बयान के बाद DG कुंदन कृष्णन ने वकील अपूर्व हर्ष के माध्यम से सुधाकर सिंह को 5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेज सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा था।
कुंदन कृष्णन के लीगल नोटिस की 6 मुख्य बातें
सांसद ने 24 जून की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना जांचे-परखे पूरी तरह बेबुनियाद आरोप लगाए। RJD सांसद ने भरत तिवारी एनकाउंटर का मुख्य सूत्रधार कुंदन कृष्णन को बताते हुए धमकियों की मनगढ़ंत कहानियां गढ़ीं। राज्य सरकार ने घटना के बाद 20 जून को ही सेवानिवृत्त जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया था और संबंधित पुलिसकर्मियों पर त्वरित कार्रवाई की थी। जब मामला पहले से जांच आयोग के सामने लंबित था, तब साक्ष्य पेश करने के बजाय मीडिया में बयानबाजी करना केवल सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है। जनप्रतिनिधि के ऐसे बयानों से समाज में यह गलत संदेश गया कि वरिष्ठ अधिकारी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं और पद का दुरुपयोग करते हैं। सोशल मीडिया और मीडिया में गलत बयान देकर IPS अधिकारी की ईमानदारी, साख और मानसिक शांति को भारी ठेस पहुंचाई गई।
स्पीकर और CM से शिकायत, CM सचिवालय का जांच का आदेश
मानहानि नोटिस मिलने पर RJD सांसद ने माफी मांगने से इनकार कर अपने स्टैंड पर कायम रहे। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई। सांसद ने तर्क दिया कि जनता के मुद्दे उठाना उनका संसदीय अधिकार है। इस तरह कानूनी नोटिस भेजना उनके विशेषाधिकार व दायित्वों के निर्वहन में बाधा है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की कि बिना सरकारी अनुमति के IPS अधिकारी द्वारा नोटिस भेजे जाने की जांच कराई जाए और मामला संसद की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए। साथ ही CM से पूछा कि क्या नोटिस भेजने की प्रशासनिक अनुमति दी गई थी। मामला तूल पकड़ने पर 27 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मानहानि नोटिस से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। दूसरी तरफ IPS कुंदन कृष्णन ने कहा, लीगल नोटिस भेजने के लिए गृह विभाग की पूर्वानुमति की जरूरत नहीं होती। मैंने नियमों और कानूनी सलाह के बाद ही नोटिस भेजा है। अब सांसद के खिलाफ सिविल सूट दाखिल करने के लिए गृह विभाग से औपचारिक अनुमति ली जाएगी।
कौन हैं IPS कुंदन कृष्णन?
1994 बैच के IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन बिहार पुलिस में DG (ऑपरेशन) का पद संभाल रहे। जनवरी में उन्हें STF और स्पेशल ब्रांच की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनका कार्यकाल 31 मार्च 2029 तक है। कुंदन कृष्णन की पहचान सख्त अफसर के रूप में रही है। 2006 में जब वे पटना के सिटी SP थे, तब बाहुबली नेता आनंद मोहन की पेशी देहरादून में थी। लौटते वक्त आनंद मोहन सहरसा जेल जाने के बजाय पटना के होटल में रुक गए थे। इसकी सूचना मिलते कुंदन कृष्णन ने होटल पर छापेमारी की, जहां उनके समर्थकों के साथ भिड़ंत हुई। इसके बावजूद वे आनंद मोहन को जेल भेजने में सफल रहे थे।