Free Kashmir Slogans at Jamia : जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। कैंपस की दीवारों पर कश्मीर और शरजील इमाम की आजादी की मांग वाले विवादित नारे लिखे पाए गए हैं। साथ ही दीवारों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। फिलहाल इन नारों को किसने लिखा है, उनकी पहचान उजागर नहीं हो पाई है। मगर, इस घटना के बाद से ही पूरे कैंपस में इस बात को लेकर भारी तनाव और सरगर्मी बढ़ गई है।

छात्रसंघ चुनाव को विरोध-प्रदर्शन जारी

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर कैंपस में पहले से ही उग्र विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। दो दिन पहले ही प्रशासन ने जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) के संविधान का नया मसौदा तैयार करने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई थी। इसके बाद गुरुवार को गालिब लॉन में छात्रों की एक आम सभा (जनरल बॉडी मीटिंग) बुलाई गई, जिसमें साल 2006 से भंग पड़े छात्र संघ को तुरंत बहाल करने की मांग बुलंद की गई। विश्वविद्यालय के नए बने छात्र संगठन यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया ने बताया कि कैंपस में चल रही भूख हड़ताल और धरने को अपना समर्थन देने के लिए कई छात्र गुटों ने यह बैठक बुलाई थी। छात्रों की इस एकजुटता से प्रशासन पर जल्द से जल्द छात्र संघ चुनावों की तारीखें घोषित करने का चौतरफा दबाव बढ़ गया है।

समिति और विद्यार्थियों में बातचीत के बाद उठाए गए कदम

इससे पहले गुरुवार को डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) नीलोफर अफजल ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को भेजे एक आधिकारिक ईमेल में बताया था कि कुलपति (VC) द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत के बाद ही ये सकारात्मक कदम उठाए गए थे। वैसे, छात्र प्रशासन के इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत नहीं हुए, जिसके चलते परिसर में शांति और हालात सामान्य नहीं हो सके।

तालीमी मेला हुआ रद्द

छात्रों के जारी हंगामे और परिसर में आने वाले लोगों व छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होने वाले अपने मशहूर वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम तालीमी मेला 2026 को रद्द कर दिया गया है। गौरतलब है कि छात्र आगामी 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए चुनाव कार्यक्रम का नोटिफिकेशन जारी करने की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से ही लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।