संत प्रेमानंद महाराज 8 अक्टूबर की प्रातः राधा केली कुंज आश्रम वापस लौट आए। उनके शिष्य दीपक लोधी (रसिक दुलारी शरण) के निधन के बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ गई थी कि महाराज ने आश्रम छोड़ दिया है और वे एकांतवास में चले गए हैं। ऐसे में, जैसे ही उनके वापस आश्रम पहुँचने की खबर लोगों को मिली, भक्त दर्शन के लिए इकट्ठा होने लगे। इस दौरान, आश्रम से जुड़े एक फेसबुक पेज के ज़रिए भी एक बात साफ करने की कोशिश की गई, जिसमें अलग-अलग आश्रमों के बारे में फैल रही अफवाहों पर सफाई दी गई।
सुबह करीब छह बजे आश्रम पहुंचे महाराज
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रेमानंद महाराज 8 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे राधा केली कुंज आश्रम पहुंचे। उनकी मौजूदगी की जानकारी मिलते ही भक्तों में उत्सुकता बढ़ गई और कई श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंच गए। महाराज के आश्रम आने और वहां से जाने के वीडियो भी सामने आए हैं। शिष्य की मौत के बाद से महाराज की दिनचर्या और आश्रम में होने वाली गतिविधियों को लेकर तरह-तरह की बातें कही जा रही थीं। उनके वापस आश्रम पहुंचने से श्रद्धालुओं के बीच चल रही चर्चाओं को लेकर फिर से ध्यान इस घटनाक्रम पर गया है।
आश्रमों के बंटवारे की चर्चा पर क्या बोले?
दीपक लोधी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि प्रेमानंद महाराज ने राधा केली कुंज आश्रम छोड़ दिया है। इसके साथ ही दोनों आश्रमों के अलग होने की बातें भी सामने आई थीं। इन चर्चाओं के बीच आश्रम से जुड़े संत महिमा फेसबुक पेज पर स्पष्टीकरण दिया गया। इसमें राधा केली कुंज आश्रम और दूसरे आश्रम को अलग-अलग बताया गया। वहीं, शिष्य की मौत के मामले में केली कुंज ट्रस्ट पहले ही दुख व्यक्त कर चुका है और पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कह चुका है। ट्रस्ट ने लोगों से अपील की थी कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।
शिष्य की मौत के बाद बदली थीं दर्शन की व्यवस्थाएं
दीपक लोधी की मौत के बाद आश्रम की गतिविधियों और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं में बदलाव की खबरें भी सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीक्षा कार्यक्रम को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसके साथ ही, टोकन के जरिए होने वाले दर्शन भी बंद किए जाने की खबरें सामने आई थीं। यमुना विहार कुंज बेलवन स्थित आश्रम में श्रद्धालुओं के प्रवेश और दर्शन पर भी प्रतिबंध लगाने की बातें कही जा रही थीं। इन व्यवस्थाओं को लेकर आगे क्या फैसला लिया गया है, इसकी जानकारी आश्रम की आधिकारिक घोषणा से ही मिल सकती है।
25 सितंबर को हुई थी दीपक लोधी की मौत
आपको बता दें, रसिक दुलारी शरण की 25 सितंबर को वृंदावन में छत से गिरने से मौत हो गई थी। जाँच के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में रसिक दुलारी एक अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से नीचे गिरते हुए दिखाई दिए। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी जान चली गई। घटना की परिस्थितियों और कारणों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी अटकल को तथ्य मानना उचित नहीं होगा।