Election Commission News : भारतीय निर्वाचन आयोग के सीनियर अफसर मनीष गर्ग के कामकाज से जुड़े विवाद में बड़ा खुलासा हुआ है। एक आरटीआई (RTI) से पता चला है कि दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को बाकायदा अलग-अलग चिट्ठी भेजकर मनीष गर्ग के कामकाज के तरीकों की शिकायत दर्ज कराई थी। वैसे, इस शिकायत पर सरकार की तरफ से कानूनी या प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया। कैबिनेट सचिवालय ने आरटीआई के जवाब में कहा गया कि इन शिकायतों को चुनाव आयोग का आधिकारिक फैसला या पक्ष नहीं माना गया। सचिवालय का दृष्टिकोण यह था कि इस स्तर पर हस्तक्षेप करना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली में सरकार का सीधा दखल माना जा सकता था।
आरटीआई कार्यकर्ता ने मांगी सूचना तो सामने आया मामला
पूरी जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश के. बत्रा की तरफ से मांगी गई सूचना के तहत सामने आई है। मामला है कि उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग पर बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी या आयोग की पूर्व अनुमति के वरिष्ठ अफसरों के कार्यभार में फेरबदल का फरमान जारी करने का आरोप लगा था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों ने कड़ा रुख अपनाते हुए मनीष गर्ग के फैसले को तुरंत निरस्त कर दिया था और साफ निर्देश दिए थे कि जब तक पूरे आयोग की सहमति से कोई नया फैसला नहीं होता, तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
कौन हैं विवादों में घिरे मनीष गर्ग?
हिमाचल प्रदेश कैडर के 1996 बैच के IAS अधिकारी मनीष गर्ग अगस्त 2024 में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) की मंजूरी के बाद उप चुनाव आयुक्त पद पर तैनात किए गए थे। उन्होंने 2 सितंबर 2024 को नया पदभार संभाला था। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पद पर सेवाएं दे रहे थे। मनीष गर्ग का नाम इससे पहले मतदाता सूची के आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा उसके एक्सेस मैनेजमेंट से जुड़े बड़े विवाद में भी उछल चुका है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने इरोनेट सॉफ्टवेयर पर फील्ड अफसरों को मिलने वाले एक्सेस पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उनका तर्क था कि कई मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को डेटाबेस का पूरा अधिकार न मिलने से मतदाता सूची के संशोधन एवं रख-रखाव जैसे संवैधानिक काम प्रभावित हो सकते थे।
10 महीनों में 14 बार दर्ज कराई गई आपत्ति
25 सितंबर : मीडिया में खबर आई कि महज 10 महीनों के भीतर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों, चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूची के आईटी डेटा नियंत्रण को लेकर 14 बार अपनी असहमति और लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
26 सितंबर : विवाद बढ़ता देख चुनाव आयोग ने सफाई दी। आयोग ने कहा कि मनीष गर्ग द्वारा काम के बंटवारे से जुड़े आदेश को लागू नहीं किया गया था। आईटी विभाग की ओवरसाइट व्यवस्था को नहीं हटाया गया था।
3 अक्टूबर : वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे को उठाते हुए मनीष गर्ग की भूमिका और चुनाव आयोग के पूरे आईटी सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल दागे।
21 अक्टूबर : RTI के माध्यम से पुष्टि हुई कि दोनों चुनाव आयुक्तों के पत्र कैबिनेट सचिवालय को प्राप्त जरूर हुए थे। उन्हें संबंधित अधिकारियों तक भेजा गया था। हालांकि, उन पत्रों के भीतर का मुख्य विषय सार्वजनिक नहीं किया गया।