Dattatreya Hosabale Latest Statement : मध्य प्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में युवाओं के असंतोष, समाज से जुड़े मुद्दों और संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के आखिरी दिन बुधवार यानी 04 नवंबर 2026 को संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले ने कई अहम विषयों पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। दत्तात्रेय होसबोले ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का मजबूती से समर्थन किया। उन्होंने मतदाता सूचियों की सफाई पर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर हैरानी जताई। होसबोले ने बताया कि वोटर लिस्ट को समय-समय पर अपडेट करना बेहद जरूरी है। इससे मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को खत्म किया जाता है।
एक शख्स के नाम दो जगहों पर क्यों वोटर लिस्ट में नाम हो?
दत्तात्रेय होसबोले ने खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि 20 साल पहले मेरे भाई ने मुझे जानकारी दी थी कि गांव की वोटर लिस्ट में मेरा नाम दर्ज है। मैं वहां कभी वोट डालने नहीं गया, बल्कि मैं जहां रहता हूं, वहीं से मतदान करता हूं। ऐसे में एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग जगहों पर क्यों होना चाहिए? मुझे भी इस संबंध में चुनाव आयोग से नोटिस मिला था। उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और विरोध करने का पूरा हक है, लेकिन किसी भी मुद्दे पर हंगामा करने से पहले उसकी सच्चाई जान लेनी चाहिए। फर्जी वोटों को हटाना एक सामान्य और पुरानी प्रशासनिक प्रक्रिया है।
'देशविरोधी न समझें, संवाद बनाएं'
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल में हुए Gen Z (आज की युवा पीढ़ी) के प्रदर्शनों का जिक्र कर होसबोले ने कहा कि युवाओं की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने वाले युवाओं को देशविरोधी मान लेना पूरी तरह गलत है। संघ का मानना है कि सरकार और समाज को इन युवाओं से लगातार बातचीत और संवाद बनाए रखना चाहिए। अपने पुराने दिनों की याद ताजा करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने बताया कि वे स्वयं जयप्रकाश नारायण के प्रसिद्ध छात्र आंदोलन का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने कहा, हर दौर के युवाओं में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा और असंतोष होता है। हम भी कभी युवा थे और हमारे भीतर भी गुस्सा था। इस ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी है, लेकिन इस असंतोष का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए करना, समाज में नफरत फैलाना या हिंसा भड़काना पूरी तरह गलत है।
आरक्षण पर RSS की नीति: जब तक भेदभाव, तब तक जारी रहे व्यवस्था
सामाजिक समानता और आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए संघ सरकार्यवाह ने साफ किया कि जब तक समाज से जातिगत और सामाजिक भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक आरक्षण व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो वर्ग सदियों से भेदभाव और असमानता का शिकार रहा है, उसे आगे बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था बेहद जरूरी है। जब तक पीड़ित समाज को यह महसूस न हो कि वे बराबरी पर आ चुके हैं, तब तक उन्हें यह सहारा मिलता रहना चाहिए। उन्होंने दुनिया के अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में जिसे आरक्षण कहा जाता है, अमेरिका में उसे अफेर्मेटिव एक्शन (सकारात्मक कार्रवाई) और कुछ अन्य देशों में पॉजिटिव डिस्क्रिमिनेशन नाम से जाना जाता है। नाम भले अलग हों, लेकिन सबका मूल मकसद समाज के पिछड़े वर्गों को बराबरी पर लाना ही है।