Jairam Ramesh latest Statement : कांग्रेस ने देशभर में शुरू होने जा रही जनगणना 2027 की पूरी प्रक्रिया को लेकर आज मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी और साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार ने जनगणना के काम में जुटने वाले कर्मचारियों की योग्यता सूची का दायरा बढ़ाया है। इसके पीछे बहुत बड़ी राजनीतिक चाल छिपी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए जयराम ने कहा, इस शीर्ष जोड़ी की अनैतिक तथा खतरनाक साजिशों की कोई तय सीमा ही नहीं रह गई है। साथ ही उन्होंने जनगणना 2027 के संचालन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका को लेकर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं।

जनगणना कर्मियों का दायरा बढ़ाने के पीछे षड्यंत्र: जयराम

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर लिखा कि मोदी सरकार की ओर से जनगणना 2027 के योग्य कर्मचारियों के दायरा बढ़ाने के पीछे गहरा षड्यंत्र है। उन्होंने खुलासा किया कि 10 से 12 जुलाई, 2026 के बीच RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर लगाया था, जिसका एकमात्र मकसद जनगणना 2027 ही था।

'मंत्रालय द्वारा गठित कमेटी में सभी सदस्य आरएसएस के'

कांग्रेस नेता ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई को देश में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई थी। इस समिति ने देश में हो रहे आबादी के बदलावों को लेकर आम नागरिकों, भारतीय संस्थानों और विदेशी संगठनों समेत तमाम पक्षों से सुझाव व जानकारियां मांगी हैं। जयराम रमेश का आरोप है कि इस कमेटी की एकमात्र हाई-लेवल बात है कि इसके तमाम सदस्य RSS के नेटवर्क और विचारधारा से जुड़े हैं। ऐसे में यह समझना बिल्कुल आसान है कि उनके पास सुझाव और जानकारियां कहां से आने वाली हैं। कांग्रेस सांसद ने 16 अक्टूबर को जारी की गई नई जनगणना अधिसूचना का जिक्र कर कहा कि इसे 10-12 जुलाई के RSS प्रशिक्षण शिविर और 14 अक्टूबर को जनसांख्यिकी बदलावों वाली कमेटी द्वारा जानकारियां मांगे जाने के पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जाना बेहद जरूरी है।

जनगणना की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म होने का आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद असल में RSS तथा भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक तरह की रोजगार गारंटी योजना बनकर रह गई है। उनका कहना है कि इस कदम से पहले से संदेह के घेरे में आई जनगणना की निष्पक्षता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और एक और स्वायत्त संस्था को तबाह कर दिया जाएगा। उन्होंने अंदेशा जताया कि एसआईआर (SIR) की तर्ज पर ही जनगणना के आंकड़ों के साथ भी बड़े पैमाने पर और खतरनाक तरीके से खिलवाड़ किया जाएगा। उन्होंने अंत में दोहराया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी की ऐसी नैतिक रूप से गलत चालों का कोई अंत नहीं है।