इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनकी जिंदगी पर आधारित फिल्म को लेकर चल रही कंट्रोवर्सी है। फिल्म 'दूसरा' से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आ गया है। हाईकोर्ट ने अब सौरव गांगुली के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस आदेश से फिल्म के निर्माताओं को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'दूसरा' के मेकर्स को निर्देश दिया है कि फिल्म की शुरुआत और अंत में हिंदी और अंग्रेजी में डिस्क्लेमर दिखाना होगा।
क्या है कोर्ट का फैसला?
कोर्ट ने कहा कि डिस्क्लेमर में साफ तौर पर बताना होगा कि सौरव गांगुली ने फिल्म में अपनी पहचान और व्यक्तित्व के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी है। साथ ही ये भी साफ करना होगा कि फिल्म का उनसे कोई ऑफिशियल कनेक्शन नहीं है। कोर्ट का कहना है कि दर्शकों को फिल्म देखते समय किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि इस प्रोजेक्ट को सौरव गांगुली की मंजूरी नहीं मिली है। इस मामले में अदालत ने फिल्म निर्माताओं को 2 करोड़ रुपये की बिना शर्त बैंक गारंटी देने का भी आदेश दिया है।
कोर्ट ने रखी खास शर्त
ये 2 करोड़ रुपये की गारंटी केस की सुनवाई पूरी होने तक सुरक्षा के तौर पर रखी जाएगी। दरअसल, फिल्म में सौरव गांगुली के क्रिकेट करियर और उनकी जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं को दिखाया गया है। ऐसे में कुछ सीन को हटाने से फिल्म की कहानी पर असर पड़ सकता है। इसी के चलते कोर्ट ने फिल्म पर पूरी तरह रोक लगाने की जगह डिस्क्लेमर और बैंक गारंटी की शर्त रखी है।
क्यों 'दूसरा' को लेकर चल रहा विवाद?
सौरव गांगुली और फिल्म निर्माता कंपनी लव फिल्म्स ने इस प्रोजेक्ट को लेकर आपत्ति जताई गई थी। उनका कहना था कि सौरव गांगुली की इजाजत के बिना उनकी पहचान, पॉपुलैरिटी और उनसे जुड़ी घटनाओं का इस्तेमाल कमर्शियल फायदे के लिए किया जा रहा है। इस विवाद में 2002 की नेटवेस्ट सीरीज का फाइनल भी चर्चा में रहा। इस मुकाबले में भारत की ऐतिहासिक जीत के बाद सौरव गांगुली का अपनी जर्सी लहराना आज लोगों के जेहन में ताजा है। फिल्म में उनके करियर से जुड़े ऐसे ही मोमेंट्स को दिखाए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। सौरव गांगुली की तरफ से ये भी अपील की गई कि उनकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के अधिकार पहले ही लव फिल्म्स को दिए जा चुके हैं। ऐसे में बिना अनुमति उनकी निजी पहचान और उपलब्धियों का इस्तेमाल करना उनके पर्सनल राइट्स का उल्लंघन हो सकता है।