बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डाल दिया है। रामपुर श्यामचंद गांव में एक ही रिश्तेदारी के तीन परिवारों के कई बच्चे इस हादसे का शिकार हुए। बच्चे श्राद्ध भोज में शामिल होने के लिए नदी पार कर रहे थे, तभी नाव बीच पानी में पलट गई। इस दर्दनाक घटना के बाद अब नाव की स्थिति, सुरक्षा इंतजाम, बचाव अभियान और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
राघोपुर के रामपुर श्यामचंद गांव में हादसे के बाद मातम पसरा हुआ है। एक ही रिश्तेदारी के 13 बच्चों की मौत से कई परिवार उजड़ गए हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतकों में रामप्रवेश राय के परिवार के सात, राजकिशोर राय के परिवार के पाँच और डोमन राय के घर की एक बच्ची शामिल है। इस हादसे में अपनी जान गंवाने वालों में अधिकांश नाबालिग थे। एक ही गाँव से इतनी बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की मौत की खबर से पूरा इलाका दहल उठा है और हर आँख नम है।
श्राद्ध भोज में जा रहे थे बच्चे
मिली जानकारी के अनुसार, भगतान टोला में सिंघेश्वर राय के घर श्राद्ध भोज का आयोजन था। इसमें शामिल होने के लिए करीब 20 से 25 लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर नदी के दूसरी ओर जा रहे थे। इसी दौरान नाव पलट गई और कई लोग पानी में डूब गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और डूब रहे लोगों को निकालने का प्रयास किया। बाद में पुलिस, प्रशासन और बचाव दल भी घटनास्थल पर पहुंचे। एसडीआरएफ की टीम ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से बचाव अभियान चलाया।
नाव की हालत को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नाव की स्थिति पहले से खराब थी। इस वजह से नाव की नियमित जांच, उसकी क्षमता और यात्रियों की सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नाव की जर्जर हालत को हादसे का आधिकारिक कारण अभी नहीं माना गया है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि नाव में कितने लोग सवार थे, उसकी स्थिति कैसी थी और क्या सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया था।
अस्पताल में मूल सुवधाओं की उपलब्धता पर सवाल
हादसे के तुरंत बाद घायलों को राघोपुर फतेहपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में ऑक्सीजन, डॉक्टरों और एंबुलेंस जैसी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी थी। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिर भी, हादसे के बाद चिकित्सा व्यवस्था की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है। यह पता लगाया जाना चाहिए कि अस्पताल में उस समय कितने चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे, जरूरी उपकरण उपलब्ध थे या नहीं और घायलों को समय पर इलाज मिल सका या नहीं।
ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव अभियान
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के शुरुआती समय में ग्रामीणों ने खुद ही बचाव की जिम्मेदारी संभाली। नदी से लोगों को निकालने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए खटिया तथा रस्सी का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने प्रशासनिक मदद पहुंचने में देरी का आरोप भी लगाया। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की मदद से अभियान चलाने की जानकारी दी गई है। बचाव कार्य में कितना समय लगा और मौके पर संसाधन कितनी जल्दी पहुंचे, इसकी स्थिति जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैशाली में हुए नाव हादसे में हुई मौतों पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है। इस हादसे से राघोपुर और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से राहत-बचाव कार्य और प्रभावित परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया जारी है।
मृतक परिवारों को 4-4 लाख की मदद
हादसे के बाद बिहार सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। यह सहायता प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए है, लेकिन हादसे से जुड़े सुरक्षा और व्यवस्था संबंधी सवालों का जवाब मिलना भी जरूरी है। नाव की स्थिति, नदी पार कराने के इंतजाम, बचाव दल की उपलब्धता और अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान कहां कमियां रहीं। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
वैशाली की इस घटना ने नदी पार करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन स्थिति में प्रशासन की तैयारी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। नावों की नियमित जांच, यात्रियों की संख्या पर नियंत्रण, जरूरी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और समय पर चिकित्सा सहायता जैसे पहलुओं की समीक्षा आवश्यक है। 13 बच्चों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को सहायता देने के साथ-साथ हादसे की निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना सबसे बड़ी जरूरत है।