Supreme Court on Delhi Rape Cases : दिल्ली-एनसीआर में नाबालिगों के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई या फाइलें तैयार करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ऐसा कड़ा रुख अपनाना होगा जिससे अपराधियों के दिल में मौत का खौफ पैदा हो। आज मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन ने कहा कि पुलिस को अपना फर्ज निभाते हुए कानून का शिकंजा कसने में जरा भी हिचकिचाना नहीं चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि जब कड़े कदम उठाए जाएंगे तो कुछ लोग मानवाधिकारों (अनुच्छेद 21) की आड़ में सवाल खड़े करेंगे, लेकिन पुलिस को इससे विचलित हुए बिना काम करना होगा। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय से 4 हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है।

किन घटनाओं पर कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान?

सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त से 21 सितंबर के दौरान सामने आईं 3 दिल दहला देने वाली घटनाओं पर खुद संज्ञान लिया है। 

ग्रेटर नोएडा-दिल्ली बस कांड (4 अगस्त) : ग्रेटर नोएडा के परी चौक से बस में सवार हुई 16 वर्षीय किशोरी के साथ चलती बस में गैंगरेप किया गया। पर्दों से ढकी बस करीब 47 किलोमीटर तक दौड़ती रही और आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट के पास छोड़ा।

स्वरूप नगर हत्याकांड (12 सितंबर) : 16 साल की नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। अगले दिन खेत के पास शव बरामद हुआ। मामले में चार आरोपियों को पकड़ा गया, जिनमें से तीन नाबालिग हैं।

आस्था कुंज पार्क वारदात (21 सितंबर) : कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में दोस्त के साथ बैठी 17 साल की छात्रा के साथ खुद को पुलिसवाला बताने वाले तीन युवकों ने दुष्कर्म किया। तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं।

'सार्वजनिक स्थलों को न बनने दें हाई-रिस्क जोन'

अदालत ने पिछली सुनवाई में कहा था कि अंधेरे, सीसीटीवी की कमी और पुलिस गश्त में लापरवाही के चलते सार्वजनिक स्थानों को अपराधियों का ठिकाना नहीं बनने दे सकते। केवल सहानुभूति जताना समस्या का हल नहीं है, बल्कि सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। आस्था कुंज पार्क का उदाहरण देते हुए पीठ ने याद दिलाया कि पहले भी एलएसआर (LSR) कॉलेज की छात्राओं ने इलाके में छेड़छाड़ और सुरक्षा में सेंध की शिकायतें की थीं, फिर भी कोई ठोस सुधार नहीं किए गए।

दिल्ली में स्थिति चिंताजनक

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के वर्ष 2024 के डेटा के अनुसार दिल्ली में पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत 1553 मामले दर्ज किए गए थे। मतलब राजधानी में हर दिन औसतन 4 से अधिक बच्चे यौन अपराधों का शिकार हो रहे। वर्ष 2025 की आधिकारिक रिपोर्ट जारी होना अभी बाकी है।