UP Election Date News : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर नया पेंच फंसता नजर आ रहा है। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी फरवरी और मार्च के दौरान मतदान कराने के प्लान पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। इस स्थिति की मुख्य वजह सोमवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) द्वारा जारी किया गया 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का टाइमटेबल है। बोर्ड के घोषित शेड्यूल के अनुसार 5 फरवरी से 24 फरवरी तक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। ऐसे में एक ही समय में बोर्ड परीक्षाएं और चुनाव दोनों साथ संपन्न कराना लगभग असंभव माना जा रहा। निर्वाचन आयोग फरवरी में ही मतदान कराने का फैसला लेता है तो बोर्ड परीक्षाओं को कम-से-कम दो महीने आगे खिसकाना पड़ेगा और नया शेड्यूल जारी करना होगा। बता दें, वर्ष 2022 के चुनाव में 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच अलग-अलग चरणों में वोट डाले गए थे। 10 मार्च को मतगणना हुई थी।
51 लाख विद्यार्थी देंगे परीक्षा
यूपी बोर्ड की इन 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में इस बार 51 लाख से भी ज्यादा विद्यार्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा आयोजित कराने के लिए सूबे के तमाम सरकारी और गैर-सरकारी (निजी) विद्यालयों को केंद्र बनाया जाता है। यही स्कूल विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग सेंटर (मतदान केंद्र) के रूप में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। इस बीच चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए नवंबर में अपर मुख्य निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। दिसंबर में खुद भारत निर्वाचन आयोग की केंद्रीय टीम जमीनी स्थिति और तैयारियों का जायजा लेने के लिए राज्य में पहुंचेगी।
22 मई 2027 में विधानसभा कार्यकाल होगा पूरा
फिलहाल निर्वाचन आयोग और प्रशासन के स्तर पर तैयारियां पूरी गति से जारी हैं, लेकिन आयोग के पास चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है। 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा की सबसे पहली बैठक 23 मई को आयोजित हुई थी, जिसके आधार पर मौजूदा विधानसभा का 5 साल का कार्यकाल 22 मई 2025 को पूरा हो रहा। ऐसे में संभावना बन रही कि आयोग फरवरी के बजाय मार्च और अप्रैल में विभिन्न चरणों में मतदान कराए। अब तो आने वाला समय और चुनाव आयोग का फाइनल शेड्यूल तय करेगा कि बोर्ड परीक्षाएं अपने निर्धारित समय पर होंगी या फिर विधानसभा चुनाव को प्राथमिकता दी जाएगी।
अंतरिम बजट पेश करने की योजना
दूसरी तरफ चुनावी आहट को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार भी अपनी विधायी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। सूत्रों के मुताबिक सरकार दिसंबर में राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अनुपूरक बजट के साथ अंतरिम बजट पेश करने की योजना बना रही। इस अंतरिम बजट का मकसद चुनाव अवधि के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य प्रशासनिक खर्चों के लिए सुचारू वित्तीय व्यवस्था बनाना है। पहले चर्चा थी कि अनुपूरक बजट के बाद एक विशेष सत्र बुलाकर अंतरिम बजट लाया जाएगा, लेकिन अब इसे दिसंबर के सत्र में ही पारित कराने की पूरी संभावना है। ध्यान रहे, 2022 के चुनावों के बाद नई सरकार बनने पर योगी सरकार ने 26 मई को पूर्ण बजट पेश किया था।