Kushagra Sagar Left BJP : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा (BJP) को झटका लगा है। बदायूं जिले की बिसौली विधानसभा सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तथा सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबा और भावुक पोस्ट लिख बीजेपी के साथ अपने 11 साल पुराने सफर को हमेशा के लिए खत्म करने का ऐलान कर दिया है। कुशाग्र का कहना है कि उन्हें संगठन में लंबे समय से अपनापन नहीं मिल रहा था। वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इस चलते उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। 

यूपी के सबसे कम उम्र के MLA में से थे एक

कुशाग्र सागर ने 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर बिसौली सीट से शानदार जीत दर्ज की थी। वे उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के विधायकों में गिने जाते थे। वैसे, 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें बिसौली सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष मौर्य के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद से वे पार्टी में खुद को दरकिनार और उपेक्षित महसूस कर रहे थे। पूर्व विधायक ने अपने इस्तीफे के बाद अपनी अगली राजनीतिक पारी या किसी अन्य पार्टी में शामिल होने को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है।

सोशल मीडिया पोस्ट में छलका दर्द 

कुशाग्र सागर ने फेसबुक पर अपनी बात रख लिखा कि किसी भी संगठन के साथ 11 साल तक पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ जुड़े रहना, वहां के कार्यकर्ताओं के लिए अपना सौ प्रतिशत देना और हर मुश्किल परिस्थिति में पार्टी के लिए खड़े रहना सिर्फ एक राजनीतिक रिश्ता नहीं होता, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। उन्होंने लिखा कि जब इतने लंबे समय की कड़ी मेहनत और वफादारी के बदले अपेक्षित सम्मान या अपनापन नहीं मिलता तो मन को बहुत गहरी ठेस पहुंचती है। यह दर्द किसी पद या कुर्सी के जाने का नहीं, बल्कि उस भरोसे और सम्मान के टूटने का होता है जिसे इंसान बरसों तक अपने दिल में संजोकर रखता है। उन्होंने याद किया कि पिछले 11 सालों में तमाम व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद उन्होंने हमेशा बीजेपी को अपना परिवार माना और अपनी क्षमता के मुताबिक पार्टी को मजबूत करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी।

आसान नहीं था यह फैसला

कुशाग्र ने अपने त्यागपत्र में कहा कि उनके लिए यह निर्णय लेना बिल्कुल भी आसान नहीं था, क्योंकि इन 11 वर्षों में उनकी अनगिनत यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने उन सभी लोगों का दिल से आभार जताया जिन्होंने इस राजनीतिक सफर में उनका साथ दिया, उन पर भरोसा जताया और अपना प्यार व सहयोग दिया। उन्होंने साफ किया कि यह उनके राजनीतिक सफर का अंत नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने की एक नई शुरुआत है।

इस्तीफे की असली वजह

कुशाग्र सागर एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता योगेंद्र सागर भी राजनीति में सक्रिय रह चुके हैं। योगेंद्र सागर ने बदायूं की ही बिल्सी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी और बाद में वे बीजेपी में शामिल हो गए थे। हालांकि, 2021 में एक छात्रा के अपहरण और गैंगरेप के मामले में कोर्ट ने योगेंद्र सागर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

बढ़ती नजदीकियों की चर्चा

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुशाग्र सागर के इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह उनके धुर विरोधी और वर्तमान सपा विधायक आशुतोष मौर्य की बीजेपी के साथ बढ़ती नजदीकियां हैं। वैसे, कुशाग्र ने अपने इस्तीफे में सीधे तौर पर किसी भी नेता का नाम लेकर कोई आरोप नहीं लगाया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद बदायूं का सियासी पारा काफी हाई हो चुका है। हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि कुशाग्र आगे क्या कदम उठाते हैं।