दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, गाजियाबाद के कुछ क्षेत्रों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 700 के पार दर्ज किया गया। प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 5 से 20 नवंबर तक पूरे NCR में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कार्यों पर अस्थायी रोक लगा दी है। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करने का निर्देश दिया गया है। बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देनी होगी।
गाजियाबाद में AQI 700 के पार, दिल्ली के कई इलाके भी प्रभावित
प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गाजियाबाद के राज नगर एक्सटेंशन में AQI 713 और संजय नगर में 711 दर्ज किया गया। वहीं, दिल्ली के सोनिया विहार में 662, विवेक विहार में 660 और आनंद विहार में 637 का स्तर सामने आया। दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी AQI 500 के ऊपर दर्ज किया गया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब बनी हुई है। प्रदूषण के कारण सुबह और शाम के समय धुंध छाने से दृश्यता पर भी असर पड़ रहा है।
20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक
CAQM के निर्देशों के अनुसार, 5 नवंबर से 20 नवंबर तक पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धूल पैदा करने वाली बाहरी निर्माण गतिविधियों और तोड़फोड़ के काम पर प्रतिबंध रहेगा। इसका उद्देश्य निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण के स्तर को कम करना है। इस प्रतिबंध के दायरे में सड़क, राजमार्ग, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, पाइपलाइन और टेलीकम्युनिकेशन से जुड़े कई निर्माण कार्य भी शामिल हैं। रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अंतरराज्यीय बस अड्डे, अस्पताल, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी परियोजनाओं को छूट दी गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं को भी निर्धारित नियमों के तहत राहत मिलेगी।
दिल्ली-NCR के इन जिलों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को WFH
निर्माण गतिविधियों पर रोक के साथ CAQM ने कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। 5 से 20 नवंबर तक दिल्ली और NCR के पांच जिलों में सरकारी तथा निजी कार्यालयों में अधिकतम आधे कर्मचारी ही शारीरिक रूप से उपस्थित रह सकेंगे। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा।
इस व्यवस्था में ये क्षेत्र शामिल हैं:
- दिल्ली
- गुरुग्राम
- फरीदाबाद
- सोनीपत
- गाजियाबाद
- गौतम बुद्ध नगर (नोएडा)
औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं को, जहां वर्क फ्रॉम होम लागू करना व्यावहारिक नहीं है, इस व्यवस्था से छूट दी गई है।
प्रदूषण बढ़ने की क्या हैं प्रमुख वजहें?
CAQM के मुताबिक, नवंबर के शुरुआती और मध्य दिनों में दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर ऐतिहासिक रूप से तेजी से बढ़ता रहा है। इस दौरान पराली और अन्य जैविक अवशेष जलाने से निकलने वाला धुआं, वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां और निर्माण स्थलों की धूल हवा को प्रदूषित करती हैं। सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की प्रक्रिया धीमी पड़ने से प्रदूषण जमीन के करीब जमा होने लगता है। यही वजह है कि इस मौसम में दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती है।
लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
खराब हवा के बीच बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण अधिक होने पर बाहर की गतिविधियां सीमित रखना, व्यायाम के लिए खुले स्थानों पर जाने से बचना और जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। आंखों में जलन या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। प्रशासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण करना और नवंबर के दौरान हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है।