IAS Divya Mittal : उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की पूर्व प्रशासनिक अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहने के बाद औपचारिक रूप से राजनीतिक सफर की शुरुआत कर दी है। गुरुवार को दोपहर 1 बजे उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी नई राजनीतिक पार्टी जननीति भारत पार्टी के गठन का ऐलान किया। 8 मिनट 29 सेकंड के इस वीडियो में उन्होंने अपनी पार्टी के मुख्य उद्देश्यों और भावी दिशा को स्पष्ट किया। उन्होंने संदेश में सूरज को निकलने के लिए किसी से अनुमति नहीं जैसी पंक्तियों के साथ राजनीतिक इरादे जाहिर किए।

 मिर्जापुर और देवरिया की DM रही

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और देवरिया जैसे प्रमुख जनपदों में बतौर जिलाधिकारी (DM) सेवाएं दे चुकीं दिव्या मित्तल के इस कदम से राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल ने शारदीय नवरात्र के अवसर पर मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद लेकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा है।

30 अगस्त को वीआरएस लेकर चौंकाया था

13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या ने 30 अगस्त को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की घोषणा कर सभी को हैरान कर दिया था। पद से त्यागपत्र देने के बाद से वे मिर्जापुर के दौरों पर थीं, जिससे कयास लगाए जा रहे थे कि वे इसी क्षेत्र को कर्मभूमि बनाएंगी। आखिरकार उन्होंने 15 अक्टूबर को अपनी नई पार्टी के गठन की आधिकारिक घोषणा कर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया।

मिर्जापुर सदर सीट का सियासी गणित और चुनौती

राजनीतिक गलियारों में मजबूत चर्चा है कि दिव्या मित्तल मिर्जापुर की सदर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकती हैं। यदि वे यहां से चुनाव लड़ती हैं, तो क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। वर्तमान में मिर्जापुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मजबूत दबदबा रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार रत्नाकर मिश्रा ने 1,18,263 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि दूसरे स्थान पर रहे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कैलाश चौरसिया को 77,921 वोट मिले थे। अब तक मिर्जापुर जिले में भाजपा और अपना दल (एस) के गठबंधन का ही दबदबा माना जाता रहा है और दोनों दलों के तालमेल से ही स्थानीय समीकरण तय होते आए हैं। पूर्व में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ दिव्या मित्तल के वैचारिक मतभेदों की खबरें भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में दिव्या मित्तल का खुद चुनावी समर में उतरना इस क्षेत्र के परंपरागत राजनीतिक शक्ति-संतुलन को सीधी चुनौती दे सकता है।