Indian GDP Growth Rate News : दक्षिण एशिया मामलों के जानकार और कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIEP) के वरिष्ठ अर्थशास्त्री क्यूंगहून किम का मानना है कि भारत कुछ दशकों में सबसे लंबे समय तक 7 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर उन्होंने समझाया कि कोरोना महामारी के झटके से उबरने के बाद भारत की आर्थिक रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी वित्तीय संस्थाएं भी आने वाले दो साल के लिए भारत के विकास दर के अनुमान को लगातार बढ़ा रहीं।
IMF और ADB ने भी तेजी की जताई है संभावना
किम का यह विश्लेषण ऐसे समय पर आया है, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), एशियाई विकास बैंक (ADB) और वर्ल्ड बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 प्रतिशत या उससे ऊपर रहने की संभावना जताई है। अर्थशास्त्री के मुताबिक भारत लगातार 5 कैलेंडर साल से 7% से ज्यादा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इससे पहले ऐसा ऐतिहासिक प्रदर्शन साल 2003 से 2007 के दौरान देखा गया था। मौजूदा वित्तीय अनुमान सही बैठते हैं तो भारत अपने दो दशक पुराने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। क्यूंगहून किम द्वारा दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2020 में आई महामारी की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। वैसे, 2021 में देश ने जबर्दस्त वापसी करते हुए 9.7 प्रतिशत की छलांग लगाई। इसके बाद के लगातार चार वर्षों तक भारत ने हर साल 7 प्रतिशत से अधिक की शानदार ग्रोथ बरकरार रखी है।
2003 में भी भारत ने खींचा था वैश्विक निवेशकों का ध्यान
किम ने पोस्ट में लिखा कि लगातार 5 साल तक 7% से ऊपर विकास दर बनाए रखना 2003-2007 वाले दौर जैसा ही है। तब भारत ने दुनिया की प्रमुख BRIC अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर वैश्विक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अगर मौजूदा आंकड़े इसी तरह बने रहे, तो भारत उस दौर को भी पीछे छोड़ देगा। यह तुलना इसलिए बेहद खास है क्योंकि 2003 से 2007 का समय भारत के आर्थिक इतिहास का सबसे मजबूत दौर माना जाता है, जब देश में रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय निवेश आया था। किम ने कहा कि 2021 से 2025 के बीच भारत की औसतन सालाना विकास दर 7.83 प्रतिशत रही, जो 2003-2007 के 7.89 प्रतिशत के बेहद करीब है। 1960 के बाद से अब तक के इतिहास में यह पिछला पांच साल का दौर भारत के लिए दूसरा सबसे तेज तरक्की करने वाला दौर साबित हुआ है।
लंबे समय तक रफ्तार बनाए रखना छोटी बात नहीं: किम
किम ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय तक इस रफ्तार को बनाए रखना कोई छोटी बात नहीं है। यह दिखाता है कि भारत की तरक्की सिर्फ महामारी के बाद की तात्कालिक रिकवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत आर्थिक नींव काम कर रही। वैश्विक संस्थाओं के बदलते नजरिए पर उन्होंने बताया कि IMF ने हाल में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से सुधारकर 7 प्रतिशत कर दिया है। अपनी अक्टूबर की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने 2027-28 में भी 7 प्रतिशत की दर रहने की उम्मीद जताई है।
कई अर्थशास्त्रियों ने अनुमानों में किए सुधार
किम के अनुसार जब-जब तिमाही GDP के नए आंकड़े सामने आए, उनके समेत कई अर्थशास्त्रियों को अपने अनुमानों में बार-बार सुधार करना पड़ा। विश्व बैंक, IMF और ADB के चार्ट भी यही दर्शाते हैं कि अनुमान लगातार ऊपर की ओर बढ़ाए गए हैं। आज जब पूरी दुनिया में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव फैले हैं और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सुस्त पड़ रही हैं, ऐसे में भारत का यह प्रदर्शन बेहद मायने रखता है।
भारत की अर्थव्यवस्था हुई काफी बड़ी: किम
अर्थशास्त्री ने समझाया कि 20 साल पहले के मुकाबले आज की भारतीय अर्थव्यवस्था काफी विशाल हो चुकी है। 2007 में भारत की कुल GDP 1 ट्रिलियन डॉलर ही थी, जो अब 4 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब है। मतलब आज 7 प्रतिशत की ग्रोथ का अर्थ अर्थव्यवस्था में पहले की तुलना में बहुत बड़ा विस्तार होना है। उम्मीद है कि 2030 के आसपास भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वैसे, यह रैंकिंग विदेशी मुद्रा दरों, महंगाई और अन्य देशों के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी।
'लगातार 7% से अधिक की आर्थिक वृद्धि बड़ी उपलब्धि'
क्यूंगहून किम ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश के लिए लगातार 7% से अधिक की आर्थिक वृद्धि बहुत बड़ी उपलब्धि है। वैसे, केवल GDP का आंकड़ा बढ़ने भर से यह तय नहीं होता कि हर परिवार की आय बढ़ गई है या जीवन स्तर सुधर गया है। आम नागरिकों तक इस आर्थिक तरक्की का फायदा पहुंचाने के लिए नए रोजगार पैदा करना, निजी निवेश को बढ़ावा देना और लोगों की कमाई बढ़ाना सबसे अहम पैमाने रहेंगे। किम ने माना कि देश के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन 1.4 अरब की आबादी वाले भारत के इस अभूतपूर्व आर्थिक प्रदर्शन का वैश्विक स्तर पर सम्मान होना चाहिए।