सर्दियों की शुरुआत होते ही उत्तर भारत में पराली जलाने की घटनाएं फिर बढ़ने लगी हैं। 15 सितंबर से 6 अक्टूबर 2026 के बीच सात राज्यों में 287 मामले दर्ज किए गए, जिनमें मध्य प्रदेश सबसे आगे रहा। सैटेलाइट निगरानी, फसल अवशेषों का व्यावसायिक इस्तेमाल और आधुनिक तकनीक प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं।