Stock Market Inside Story : भारतीय शेयर बाजार की स्थिति देख निवेशकों के मन में सवाल उठ रहा कि यह किस दिशा में जा रहा। हालत ऐसी है कि अमेरिकी बाजार में गिरावट आती है तो उसका असर हम पर तुरंत पड़ता है। हैरानी की बात तब होती है, जब अमेरिकी बाजार ऊपर चढ़ रहे होते हैं, तब भी हमारे यहां बिकवाली रुकने का नाम नहीं लेती। पिछले 10 महीनों से भारतीय निवेशक इसी असमंजस और डर के साये में जी रहे हैं।

बजट के दिन से निवेशकों की उम्मीदों को झटका

कुछ समय पहले आए बजट के दिन से निवेशकों की उम्मीदों को करारा झटका लगा था। सबको यह उम्मीद थी कि सरकार बाजार को संभालने के लिए बड़ी राहत देगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स यानी एसटीटी बढ़ा दिया गया, जिससे बाजार उसी दिन धड़ाम हो गया। इसके बाद जब मार्च में बाजार में भारी गिरावट आई थी, तब वित्त मंत्री ने इंडस्ट्री के जानकारों से बात कर उम्मीदें जरूर जगाई थीं कि शायद कैपिटल गेन्स टैक्स या एसटीटी में राहत मिल सकती है, लेकिन वह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह गया। ऊपर से कच्चे तेल के बढ़ते दाम और लगातार कमजोर होता रुपया इस आग में घी का काम कर रहा है।

बीते 9 दिनों में विदेशी निवेशकों ने निकाले 60 हजार करोड़ रुपए

इस संकट का बड़ा कारण विदेशी निवेशकों का अपना पैसा निकाला जाना है। इस वर्ष अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 4 लाख करोड़ रुपए निकाले हैं। बीते 9 दिनों में 60 हजार करोड़ विदेशी निवेशक बाजार से निकाले हैं। आज शेयर बाजार पूरी तरह से नहीं गिरा है तो उसकी इकलौती वजह घरेलू और रिटेल निवेशक हैं, जिन्होंने म्यूचुअल फंड और सीधे शेयरों में पैसा लगाकर बाजार को थाम रखा है। मगर, यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि केवल घरेलू निवेशकों के भरोसे लंबे समय तक बाजार को इस बड़े संकट से उबारना नामुमकिन है।

अमेरिका में बिना जोखिम 5% रिटर्न मिल रहा

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जटिल टैक्स प्रणाली विदेशी निवेशकों को बहुत परेशान कर रही है। देश में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एलटीसीजी 12.5% और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स यानी एसटीटीसी 20% है। इसके अलावा एफएंडओ पर बढ़ा हुआ टैक्स उनके मुनाफे को सीधे तौर पर खा रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका में बिना बड़े जोखिम के सुरक्षित रिटर्न 5% से ज्यादा मिल रहा। ऐसे में विदेशी निवेशक कमजोर होते रुपये वाले इमर्जिंग बाजारों में पैसा क्यों रोकेंगे?