UPI MDR News : डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों उपयोगकर्ताओं और कारोबारियों के लिए राहत की खबर है। यूपीआई (UPI) पेमेंट पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज को दिवाली तक टाल दिया गया है। नियमों के मुताबिक इस नए शुल्क को 15 अगस्त की जगह 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था। इसके तहत दुकानदारों को 2000 रुपए से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4% का चार्ज देना पड़ता। वैसे, आम लोगों के लिए रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने आगामी त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर इस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है। संस्था का कहना है कि इस चार्ज को दिवाली के ठीक बाद लागू किया जाएगा। वैसे, अभी इसकी सटीक तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।

सरकार के MDR प्रस्ताव की 3 मुख्य बातें:

0.4% चार्ज : कोई ग्राहक किसी दुकानदार को 2000 रुपए से ज्यादा का यूपीआई भुगतान करता है तो मर्चेंट को कुल राशि पर 0.4% का MDR चार्ज चुकाना होगा।

अधिकतम 300 रुपए का कैप : कोई बड़ा पेमेंट 75,000 रुपए या उससे अधिक का होता है तो प्रतिशत के बजाय केवल 300 रुपए का अधिकतम फ्लैट चार्ज लागू होगा।

विशेष सेक्टरों के लिए फ्लैट फीस : ग्राहक रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन (फ्यूल) पर 2000 रुपए से ज्यादा का भुगतान करते हैं तो प्रति ट्रांजैक्शन सिर्फ 5 रुपए का फ्लैट चार्ज लगेगा।

देशभर में हुआ था विरोध

सरकार के इस प्रस्तावित फैसले के सामने आते ही देश भर के व्यापारियों और विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। यह विरोध दो अलग-अलग स्तरों पर देखने को मिला। जहां एक तरफ विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक दृष्टिकोण से आम जनता की जेब पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी तरफ कारोबारी संगठनों ने व्यापार की बढ़ती लागत और ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष बोझ पड़ने की आशंका जताई। उनका साफ तौर पर कहना था कि इस नियम से देश के छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वह फीस होती है, जो कोई भी व्यापारी या दुकानदार डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल पेमेंट जैसे कि यूपीआई, प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीन या पेमेंट गेटवे का उपयोग करने के एवज में बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों को देता है। यह शुल्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और पैसों के ट्रांसफर नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने की लागत को पूरा करने के लिए वसूला जाता है। नियम के अनुसार यह चार्ज व्यापारी को देना होता है, न कि ग्राहक को।

2,000 रुपए से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शंस का गणित

दुकानदारों को मिलने वाले कुल यूपीआई भुगतानों में 2,000 रुपए से बड़े ट्रांजैक्शन गिनती के मामले में 5% से भी कम बैठते हैं। मगर, जब बात इनकी कुल वैल्यू की आती है तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाता है। कुल पैसों का 67% हिस्सा इन्हीं बड़े ट्रांजैक्शंस से आता है, जो हर महीने करीब 6 लाख करोड़ रुपए बैठता है। यह रकम पूरे देश में होने वाले कुल यूपीआई लेन-देन की वैल्यू का 20% है। मतलब भले बड़े लेन-देन संख्या में कम हों, लेकिन बाजार में घूमने वाले पैसों का बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं के जरिए बनता है।

UPI MDR चार्ज का व्यापारियों पर अलग-अलग असर

छोटे व्यापारियों को सुरक्षा : जिन व्यापारियों का महीनेभर का कुल यूपीआई कलेक्शन 1 लाख रुपए तक है, उनसे 2000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन पर भी शुल्क नहीं लिया जाएगा।

बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज : जिन दुकानदारों की एक महीने की कमाई 1 लाख रुपए से ज्यादा है, उनसे 2000 रुपए से बड़े हर पेमेंट पर 0.4% MDR और साथ में 18% जीएसटी (GST) वसूला जाएगा।

2,000 रुपए तक की बिक्री पूरी तरह फ्री : बड़े व्यापारियों को भी 2000 रुपए या उससे कम राशि के छोटे यूपीआई भुगतानों पर फीस नहीं देनी होगी।

ट्रांजैक्शन के आधार पर तय होगी लिमिट : 2000 रुपए की यह छूट पूरे दिन की कुल बिक्री पर नहीं, बल्कि ग्राहक द्वारा किए जाने वाले हर एक अलग-अलग पेमेंट पर लागू होगी।

300 रुपए की अधिकतम कैपिंग : बड़े भुगतानों के मामले में 75 हजार रुपए या उससे अधिक के किसी भी ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपए प्लस 18% जीएसटी ही लिया जाएगा।

खास सेक्टरों के लिए 5 रुपए की फीस : पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और शिक्षा से जुड़े 2000 रुपए से बड़े भुगतानों पर प्रतिशत के बजाय केवल 5 रुपए की फ्लैट फीस लगेगी।

कैटेगरी बदलने का सख्त नियम : कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीनों तक 1 लाख रुपए से अधिक का कलेक्शन लेता है तो बैंक उसे खुद बड़े मर्चेंट की कैटेगरी में शिफ्ट कर देगा।

कार्ड पेमेंट की तुलना में सस्ता : क्रेडिट कार्ड (1.5% से 2.5%) और डेबिट कार्ड (0.90% तक) पर लगने वाले भारी-भरकम MDR चार्ज के मुकाबले यूपीआई का यह नया चार्ज काफी कम रहेगा।

सरकार ने 2021 में शुरू की थी प्रोत्साहन योजना

देश में डिजिटल भुगतान और यूपीआई को बढ़ावा देने तथा इसे पूरी तरह से मुफ्त बनाए रखने के लिए सरकार ने वर्ष 2021-22 से एक विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत ग्राहक से छोटे दुकानदार को मिलने वाले 2000 रुपए तक के यूपीआई पेमेंट पर 0.15% का इंसेंटिव दिया जाता था। वित्त वर्ष 2024-25 तक इस मद में कुल 8276 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया जा चुका है। बता दें कि देश में जून 2026 तक 55.5 करोड़ एक्टिव यूपीआई यूजर्स मौजूद हैं।