India US Trade Deal Udpdate : भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। दोनों देशों के बीच वार्ता का पहला चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। अब यह प्रक्रिया अपने अगले चरण यानी कानूनी मसौदा तैयार करने के स्तर पर पहुंच गई है। सरकार ने इसकी पुष्टि की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान संयुक्त रूप से इसकी जानकारी दी। दोनों ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का प्राथमिक ढांचा तय कर लिया गया है। फिलहाल इसके कानूनी दस्तावेजीकरण का काम जारी है।
प्रतिस्पर्धी लाभ मिलते ही लागू होगी डील
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते के क्रियान्वयन पर स्थिति साफ करते हुए कहा, अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला हिस्सा अंतिम रूप ले चुका है। वर्तमान में इसकी लीगल ड्राफ्टिंग पर काम चल रहा है। हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। जैसे ही भारत को अपने अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर और अनुकूल व्यापारिक स्थिति हासिल होगी, इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया जाएगा।
यूरोपीय संघ (EU) संग FTA पर अपडेट
व्यापार आंकड़ों पर आयोजित इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ जारी भारत की फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर चालू वर्ष के दिसंबर तक हस्ताक्षर कर लिए जाएंगे। अगले वर्ष फरवरी या मार्च तक इसे पूर्ण रूप से लागू किए जाने की संभावना है।
बाजार पहुंच और टैरिफ स्थिरता पर भारत का जोर
व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल ने भी वॉशिंगटन के साथ चल रही बातचीत को सकारात्मक और सही दिशा में बताया। उन्होंने कहा, हमारी कोशिश है कि इस व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देकर इस पर हस्ताक्षर किए जाएं। इस समझौते के माध्यम से भारत की मुख्य प्राथमिकता अमेरिकी बाजार तक विशेष और सुगम पहुंच हासिल करना तथा टैरिफ दरों में अधिक स्थायित्व लाना है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अमेरिका में वे शर्तें मिलें जो अन्य प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अधिक अनुकूल हों।
अमेरिकी राजदूत का बयान और ट्रम्प का संभावित फैसला
इससे पहले दिन में भारत में नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी द्विपक्षीय वार्ता की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने अपनी व्यापार समझौते की चेकलिस्ट में शामिल प्रमुख और जटिल मुद्दों को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। गोर ने वार्ता की इस तेज गति को अविश्वसनीय करार दिया। अमेरिकी राजदूत ने उस अमरीकी कानून (जैसे CAATSA व प्रतिबंध कानून) का भी जिक्र किया, जिसके तहत रूस से कच्चे तेल व गैस का आयात करने वाले या प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है। गोर ने बताया कि इस संवेदनशील विषय पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अगले 10 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की संभावना है।
2025 से बातचीत जारी
भारत और अमेरिका वर्ष 2025 की शुरुआत से ही इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर लगातार बातचीत कर रहे। इस वार्ता का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर बने तनाव को समाप्त करना, गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना और एक-दूसरे के बाजारों में पहुंच को आसान बनाना है।
व्यापारिक महत्व
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। इस समझौते के लागू होने से भारत के टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, आईटी सेवा और इंजीनियरिंग सामानों के अमेरिकी बाजार में निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।