मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि वह उनके खिलाफ सामान्य कानूनी कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं। एक यूट्यूब चैनल पर चर्चा के दौरान सिंघवी ने कहा कि हर मुद्दे को लेकर अदालत का रुख करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के पास जाना एक संवैधानिक रास्ता है, लेकिन हर समस्या का समाधान अदालत से तलाशना उचित नहीं है।

'हर बात के लिए कोर्ट जाना सही नहीं'

सिंघवी ने कहा कि अदालत में मामला जाने के बाद नोटिस, जवाब और सुनवाई की प्रक्रिया होती है, जिसमें काफी समय लग सकता है। उनके मुताबिक कई मामलों में निर्णय आने में लंबा वक्त लग जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि हर राजनीतिक या संस्थागत विवाद को न्यायपालिका के सामने ले जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। सिंघवी ने यह भी कहा कि न्यायपालिका हर समस्या का इलाज नहीं है।

महाभियोग को बताया एक विकल्प

कांग्रेस सांसद ने कहा कि अगर किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता महसूस होती है तो संविधान में उपलब्ध दूसरे रास्तों पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने महाभियोग यानी impeachment को ऐसे ही एक विकल्प के तौर पर गिनाया। सिंघवी ने कहा कि पहले भी महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन वह न पूरी तरह खारिज हुई और न ही आगे बढ़ पाई।

राजनीतिक प्रक्रिया पर दिया जोर

सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया के अलावा राजनीतिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। उनके मुताबिक राजनीतिक दलों को अपने मुद्दों को जनता के बीच ले जाना चाहिए और अभियान तथा प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन और सार्वजनिक अभियान भी राजनीतिक व्यवस्था में प्रभाव डाल सकता है।

युवाओं की भूमिका का किया जिक्र

सिंघवी ने मौजूदा विवाद के संदर्भ में युवाओं की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर युवा किसी मुद्दे को लेकर संगठित तरीके से आवाज उठाते हैं तो उसका प्रभाव ज्यादा हो सकता है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जब युवा किसी राजनीतिक दल से सीधे जुड़े हुए समूह के बजाय स्वतंत्र रूप से किसी मुद्दे पर अभियान चलाते हैं, तो उनकी बात को अलग तरह से देखा जा सकता है।

CEC को लेकर पहले भी उठे हैं सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर पिछले दिनों विपक्षी दलों की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं। यह विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्टों के बाद तेज हुआ। कुछ विपक्षी नेताओं ने CEC के खिलाफ कार्रवाई और हटाने की मांग भी की है। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत आयोग के फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी से लिए गए हैं। इसलिए अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के आरोपों को उनके बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सिंघवी के बयान का क्या मतलब है?

सिंघवी का ताजा बयान इस मायने में महत्वपूर्ण है कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की मांग का समर्थन नहीं किया। उन्होंने इसके बजाय लोकतांत्रिक, राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं के इस्तेमाल पर जोर दिया। उनका कहना है कि संस्थागत विवादों में अदालत का रास्ता अपनाने के साथ-साथ संविधान में मौजूद अन्य प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक माध्यमों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यह सिंघवी का व्यक्तिगत राजनीतिक-कानूनी दृष्टिकोण है, न कि चुनाव आयोग या सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्णय।