CEC Gyanesh Kumar And Maharashtra SIR : चुनाव आयोग में जारी विवादों के बीच महाराष्ट्र में चुनाव आयोग के विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब कानूनी विवाद में फंस गई है। मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में वोटर लिस्ट से मनमाने तरीके से लोगों के नाम हटाने, प्रक्रिया में गड़बड़ी एवं चुनाव आयोग के भीतर मतभेद जैसे आरोप लगाए गए हैं।

ज्ञानेश कुमार के 14 आदेशों को रद्द करने की मांग

कोल्हापुर पीठ में दाखिल याचिका 3 स्थानीय निवासियों ने वकील असीम सरोदे की टीम के माध्यम से दायर की है। इसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त Gyanesh Kumar के 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है। यह भी कहा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार वोटर हटाने, डाटाबेस एक्सेस, सॉफ्टवेयर में रुकावट तथा फॉर्म-6 में जुलाई में हुए बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। याचिका में इसे सीईसी और अन्य सीईसी एक्ट 2023 की धारा-18 का उल्लंघन बताया है। 

महाराष्ट्र में SIR पर रोक लगाएं

दूसरी याचिका मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य ने दाखिल की है। याचिका सुप्रीम कोर्ट के एडीआर फैसले का हवाला देते हुए दावा करती है कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर पहचान-पत्र मांग रहे, जो चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है। साथ ही जो वोटर घर में नहीं मिले, उन्हें बिना सुनवाई या लिखित आदेश के गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में डाला गया। याचिकाकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वे चुनाव रोकना नहीं चाहते है, बल्कि केवल कानून का सही पालन चाहते हैं। दोनों याचिकाओं में हटाए वोटरों को वापस जोड़ने, महाराष्ट्र में एसआईआर पर रोक लगाने एवं मामले की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की गई है। दोनों याचिकाओं पर अगले हफ्ते सुनवाई की उम्मीद है।