गोरखपुर में लगातार बारिश के बाद नदियों के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बर्डघाट पर राप्ती नदी का पानी चेतावनी स्तर के आसपास पहुंच गया है। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया है।
बर्डघाट पर लगातार बढ़ रहा राप्ती का पानी
राप्ती नदी का जलस्तर पिछले कुछ समय से लगातार ऊपर जा रहा है। बर्डघाट पर नदी का पानी खतरे के निशान से करीब आधा मीटर नीचे बताया गया है। जलस्तर बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। प्रशासन लगातार जलस्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रख रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते राहत और बचाव की कार्रवाई शुरू की जा सके।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय हैं। अधिकारियों के मुताबिक नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। इसके लिए 24 घंटे चलने वाला नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय किया गया है। एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल और ग्राम प्रधानों को अपने-अपने क्षेत्रों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नाविकों और गोताखोरों को भी जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
गांवों में भी बढ़ी सतर्कता
राप्ती के साथ आसपास की दूसरी नदियों के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक रोहिन और घाघरा नदी के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखने के साथ कर्मचारियों को क्षेत्र में लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। गोरखपुर के कुछ ग्रामीण इलाकों में नदी के बढ़ते पानी और कटान का असर भी सामने आया है। पीपीगंज के हिरुआ क्षेत्र में राप्ती के कटान से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
पंपिंग स्टेशन भी पूरी क्षमता से चल रहे
भारी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच शहर में जलभराव को नियंत्रित करने के लिए कई पंपिंग स्टेशनों को पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है। राप्ती और रोहिन नदी के बढ़ते पानी को देखते हुए कुछ रेग्युलेटर भी बंद किए गए हैं, जबकि अन्य रेग्युलेटर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और संवेदनशील इलाकों में किसी भी आपात स्थिति से पहले जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने की है।