Khyber Pakhtunkhwa Emergency News : पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय बहुत बड़े संकट से जूझ रहा। एक तरफ जहां देश में आतंकी हमले हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी (PTI) के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर सरकार का खुलकर विरोध कर रहे। इन दोनों मोर्चों पर घिरी शहबाज शरीफ सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। हालात को बिगड़ता देख शहबाज शरीफ की सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी (आपातकाल) और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है। गवर्नर शासन लागू होते ही प्रांतीय सरकार की तमाम शक्तियां अब गवर्नर के पास चली गई हैं। इसके अलावा प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 11 सदस्यों की एक विशेष सलाहकार परिषद गठित की गई है। 12 जिलों के कामकाज को संभालने के लिए अलग से नया सचिवालय भी बनाया गया है।

सेना तैनात करने का आदेश

अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा और आतंकवाद का इतिहास काफी पुराना रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि वहां की स्थानीय सरकार आतंकवाद को रोकने में मदद नहीं कर रही थी। इसी वजह से गृह मंत्रालय ने 11 अक्टूबर को संविधान के अनुच्छेद 245 का इस्तेमाल करते हुए वहां फौज (सेना) तैनात करने का फरमान जारी कर दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आंकड़े जारी कर बताया कि पिछले 2 वर्षों के दौरान खैबर पख्तूनख्वा में 6200 आतंकी घटनाएं हुई हैं। इनमें 1200 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने बताया कि इस प्रांत में 1.25 लाख पुलिसकर्मी तैनात हैं, लेकिन फिर भी 17 हजार पद खाली पड़े हैं। इसी कमी को पूरा करने और सुरक्षा बहाली के लिए सेना बुलाई गई है। वैसे, इमरान खान की पार्टी PTI ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया है।

कराची में भी कड़े प्रतिबंध और धारा-144

खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ अब कराची में भी पाबंदियां बढ़ा दी गई हैं। प्रशासन ने 11 से 20 अक्टूबर तक कराची में धारा-144 लागू कर दी है। इसके तहत किसी भी स्थान पर पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने, रैली निकालने, विरोध-प्रदर्शन करने पर रोक होगी। सरकार ने कहा है कि प्रदर्शन के चलते ट्रैफिक जाम लग रहा था, जिससे आम जनता और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में काफी दिक्कतें आ रही थीं।

इमरान खान की रिहाई को लेकर सड़कों पर समर्थक

असल में PTI के कार्यकर्ता कराची की अलग-अलग जगहों पर बड़ा प्रदर्शन करने की योजना बना रहे थे। उनकी मांग है कि इमरान खान को तुरंत जेल से रिहा किया जाए, देश में कानून का राज कायम हो और संविधान का पालन किया जाए। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से ही उनके समर्थक लगातार सड़कों पर उतरकर शहबाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।

क्या दबाव में है सरकार और सेना?

पाकिस्तान के सामने इस वक्त दोहरी चुनौती खड़ी है। पहली लगातार बढ़ते आतंकवाद पर लगाम लगाना। दूसरी इमरान खान समर्थकों के भारी राजनीतिक विरोध को संभालना। सेना के उतरने और कड़े प्रतिबंध लगाने के बाद वहां शांति कायम हो पाएगी या फिर सरकार, सेना और विपक्ष के बीच यह टकराव और ज्यादा हिंसक रूप ले लेगा, यह देखना आने वाले दिनों में बेहद अहम होगा।